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Chitragupta Puja ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चित्रगुप्त हर प्राणी के अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और यमराज को बताते हैं।
कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त को अपना आराध्य मानकर पूजा करते हैं। इस साल चित्रगुप्त पूजा कल यानी 16 मार्च दिन रविवार को की जाएगी तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा दिन तारीख और मंत्र आदि बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
चित्रगुप्त पूजा की तारीख और मुहूर्त—
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि 15 मार्च दिन शनिवार की दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से आरंभ हो रहा है, जो 16 मार्च दिन रविवार को शाम 4 बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। वही द्वितिया तिथि का सूर्योदय 16 मार्च को होगा। इसलिए इसी दिन चित्रगुप्त पूजा की जाएगी।
भगवान चित्रगुप्त की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 36 मिनट से 11 बजकर 6 मिनट तक है। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक। तीसरा मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 4 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा शाम को 6 बजकर 32 मिनट से रात 8 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
भगवान चित्रगुप्त की आरती—
ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे॥
विघ्न विनाशक मंगलकर्ता,
सन्तनसुखदायी ।
भक्तों के प्रतिपालक,
त्रिभुवनयश छायी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,
पीताम्बरराजै ।
मातु इरावती, दक्षिणा,
वामअंग साजै ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक,
प्रभुअंतर्यामी ।
सृष्टि सम्हारन, जन दु:ख हारन,
प्रकटभये स्वामी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
कलम, दवात, शंख, पत्रिका,
करमें अति सोहै ।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवनमन मोहै ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
विश्व न्याय का कार्य सम्भाला,
ब्रम्हाहर्षाये ।
कोटि कोटि देवता तुम्हारे,
चरणनमें धाये ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
नृप सुदास अरू भीष्म पितामह,याद तुम्हें कीन्हा ।
वेग, विलम्ब न कीन्हौं,
इच्छितफल दीन्हा ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
दारा, सुत, भगिनी,
सबअपने स्वास्थ के कर्ता ।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी,
तुमतज मैं भर्ता ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
बन्धु, पिता तुम स्वामी,
शरणगहूँ किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
आसकरूँ जिसकी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
जो जन चित्रगुप्त जी की आरती,
प्रेम सहित गावैं ।
चौरासी से निश्चित छूटैं,
इच्छित फल पावैं ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥
न्यायाधीश बैंकुंठ निवासी,
पापपुण्य लिखते ।
'नानक' शरण तिहारे,
आसन दूजी करते ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फल को पूर्ण करे ॥
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