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धर्म-अध्यात्म
Chhath Sandhya Arghya: छठ महापर्व का आज तीसरा दिन, जानें-सूर्य को संध्या अर्घ्य देने के नियम
Sarita
27 Oct 2025 10:51 AM IST

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Chhath Sandhya Arghya: छठ महापर्व के दौरान भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है। आज छठ महापर्व का तीसरा दिन है। आज संध्या अर्घ्य का दिन है। आज शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। परिवार और संतान की खुशहाली की कामना करते हुए डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
छठ पूजा का व्रत संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस व्रत में डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है? सूर्य को अर्घ्य देने के क्या नियम हैं? आइए जानें इसके बारे में।
छठ पूजा के पहले अर्घ्य का समय:
छठ पूजा के दौरान आज शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस दौरान सूर्य और षष्ठी माता को समर्पित मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दिन, भक्त निर्जला व्रत रखते हैं, जो खरना के प्रसाद ग्रहण करने के बाद शुरू होता है। संध्या अर्घ्य का दिन छठ पूजा का मुख्य दिन होता है। आज सायंकालीन अर्घ्य शाम 4:50 बजे से 5:41 बजे तक है। कल, ऊषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) दिया जाएगा, जो व्रत के समापन का प्रतीक है।
सूर्य अर्घ्य देने के नियम:
सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे या पात्र का उपयोग करना चाहिए। सायंकालीन अर्घ्य देते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। सूर्य को जल देते समय दोनों हाथ सिर के ऊपर रखने चाहिए। सूर्य को अर्पित किए जाने वाले जल में लाल चंदन, सिंदूर और लाल फूल डालने चाहिए। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र "ॐ सूर्याय नमः" का जाप करना चाहिए। इसके बाद, सूर्य की ओर मुख करके सूर्य की तीन परिक्रमा करनी चाहिए। जल को पैरों पर गिरने से बचाना चाहिए। इसे किसी बर्तन या ज़मीन पर विसर्जित करना चाहिए।
सायंकालीन अर्घ्य का महत्व:
छठ महापर्व के दौरान, सायंकालीन अर्घ्य सूर्य देव की पत्नी प्रत्यूषा को समर्पित किया जाता है, जिन्हें सूर्य की अंतिम किरण माना जाता है। सूर्य देव को संध्या अर्घ्य कृतज्ञता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। संध्या अर्घ्य के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने की भावना को भी दर्शाता है।
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