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धर्म-अध्यात्म
Chhath Puja 2025: जानिए छठ पूजा में सूर्य और छठी मैया की एक साथ पूजा का शास्त्रीय कारण
Sarita
25 Oct 2025 12:47 PM IST

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Chhath Puja 2025: लोक आस्था का महापर्व छठ, सूर्य देव की आराधना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को समर्पित एक अनूठा पर्व है। यह पर्व जितना सूर्य देव को समर्पित है, उतना ही छठी मैया की भक्ति का भी प्रतीक है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस महापर्व में प्रत्यक्ष सूर्य देव और लोक देवी छठी मैया की एक साथ पूजा क्यों की जाती है? आइए इसके पीछे के शास्त्रीय और पौराणिक कारणों को जानें।
छठी मैया सूर्य देव की बहन हैं:
मान्यता के अनुसार, छठ पूजा के दौरान सूर्य देव और छठी मैया की एक साथ पूजा करने का सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय कारण उनका भाई-बहन का रिश्ता है।
पौराणिक मान्यता: लोक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है। इसलिए, छठ के दौरान, भक्त (व्रती) अपनी बहन, छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। यह भाई-बहन और प्रकृति के बीच के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। छठ शब्द संस्कृत शब्द षष्ठी से संबंधित है, जिसका अर्थ है छठा दिन। यही कारण है कि छठ पर्व षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन छठी मैया की पूजा की जाती है। पुराणों में वर्णित है कि छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि महिलाएं संतान सुख और अपने परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
सूर्य और शक्ति का संयुक्त रूप:
सर्वप्रथम शक्ति की पूजा: ज्योतिष और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, किसी भी देवता की पूजा से पहले शक्ति की पूजा करना महत्वपूर्ण माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया को सूर्य देव का शक्ति रूप भी माना जाता है। इसलिए, छठ पर्व पर सूर्य की पूजा से पहले छठी मैया की शक्ति के रूप में पूजा की जाती है।
उषा और प्रत्यूषा: छठ पूजा के दौरान, भक्त अस्त होते सूर्य (शाम का अर्घ्य) और उगते सूर्य (सुबह का अर्घ्य) को अर्घ्य देते हैं। डूबते सूर्य की अंतिम किरण को प्रत्यूषा और उगते सूर्य की पहली किरण को उषा कहते हैं। वेदों में छठी मैया को उषा (सूर्य की पत्नी या किरणों की देवी) का भी एक रूप माना गया है। इस प्रकार, सूर्य के साथ-साथ उनकी शक्ति और प्रकाश की भी पूजा की जाती है।
पूजा का अर्थ: इस प्रकार, छठ पूजा के दौरान सूर्य देव की पूजा शारीरिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के लिए की जाती है, जबकि छठी मैया की पूजा संतान की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है।
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