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धर्म-अध्यात्म
Chaturmas 2025: जानें, चतुर्मास के दौरान कौन से कार्य हैं शुभ और कौन से वर्जित
Sarita
4 July 2025 6:14 AM IST

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Chaturmas 2025: जैसे की सब जानते हैं कि साल में ऐसे चार महिने होते है जिस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस समय को चतुर्मास कहा गया है और इसका प्रारंभ हर साल देवशयनी एकादशी से होता है। साल 2025 में देवशयनी एकादशी आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी के 06 जुलाई को मनाई जाएगी। मान्यता है कि चातुर्मास के इन चार महीनों में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और पाताल में निवास करते हैं। कहा जाता है कि इन चार महीनों के लिए भगवान विष्णु अपना सारा कार्यभार भगवान शिव को सौंप देते हैं। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव धरती लोक में निवास करते हैं। कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाए तब उस काल के दौरान कई तरह के कामों को करने की मनाही होती है। तो आइए में कौन से है वो कार्य जिन्हें नहीं करना चाहिए और कौन से कार्य किए जा सकते हैं।
इस दौरान कौन से कार्य न करें:
भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना गया है और हर कार्य के वे साक्षी होते है ऐसे में जब वे योग निद्रा में हो तो किसी प्रकार का कोई भी मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। इस दौरान चार मास तक विवाह, सगाई, जातकर्म संस्कार, गृह प्रवेश जैसे सभी मंगल कार्य निषिद्ध होते हैं। इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य न करें।
इसके अलावा कहा जाता है कि चतुर्मास के दौरान बाल और दाढ़ी भी नहीं कटवाने चाहिए और न ही किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन ग्रहण करना चाहिए और न ही किसी भी प्रकार का नशा करना चाहिए। साथ ही इस समय पर दूध, दही, बैंगन, मूली, नमक, पत्तेदार सब्जियां, मसालेदार भोजन, शकर आदि जैसी कुछ विशेष चीजों का सेवन न करने की भी सलाह दी जाती है।
चतुर्मास के दौरान बहुत से त्यौहार और व्रत आते हैं। ऐसे में यदि आप उस दौरान व्रत रखते हैं, तो ध्यान रखें की यात्रा न करें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दौरान पड़ने वाले सारे व्रत विशेष साधना के तौर पर किए जाते हैं।
चतुर्मास के दौरान क्या करना चाहिए:
मान्यता है कि चतुर्मास के दौरान शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए और क्योंकि ऐसा माना जाता है कि चतुर्मास में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करने से जातक की हर मनोकामना पूरी होती है।
भगवान विष्णु योग निद्रा में क्यों न हो लेकिन इस दौरान एकादशी व्रत और उनकी पूजा करने में किसी भी तरह की मनाही नहीं होती है। कहा जाता है कि इस दौरान पाठ पूजा, मंत्रों का जाप और ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए। कहा जाता है कि इस दौरान सादा भोजन करना चाहिए और फर्श पर सोना चाहिए।
इस समय को दान पुण्य के और तीर्थ यात्रा करने के लिए भी बेहद महत्व दिया गया है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन, वस्त्र, छाता, चप्पल और अन्न का दान अवश्य करना चाहिए। कहा जाता है कि इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं। ऐसे में जितना हो सके चाहें अपनी इच्छा अनुसार ही जरूरतमंदों को दान जरूर देना चाहिए।
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