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धर्म-अध्यात्म
Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन पूजा में पढ़ें मां कात्यायनी की कथा, विवाह में आ रही रुकावटें होंगी दूर
Sarita
3 April 2025 8:23 AM IST

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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन पूजा में पढ़ें मां कात्यायनी की कथा, विवाह में आ रही रुकावटें होंगी दूर
Chaitra Navratri 2025: शास्त्रों में देवी कात्यायनी के स्वरूप का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि वे चार भुजाधारी हैं. माता एक हाथ में तलवार, दूसरे में पुष्प, तीसरा हाथ अभय मुद्रा में है और चौथा वर मुद्रा में है. मान्यता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों की प्राप्ति हो जाती है. इनके पूजन से शुक्र की स्थिति बेहतर होती है और वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी समस्याएं दूर होती हैं | हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. इस दौरान मां भगवती के नौ रूपों के अराधना की जाती है. वहीं नवरात्रि के छठवें दिन मां आदिशक्ति के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है. इनका जन्म महर्षि कात्यायन के घर हुआ था, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा|
मां कात्यायनी की कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, वनमीकथ का नाम के महर्षि थे, उनका एक पुत्र था जिसका नाम कात्य रखा गया. इसके बाद कात्य गोत्र में महर्षि कात्यायन ने जन्म लिया, उनकी कोई संतान नहीं थी. उन्होंने मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें साक्षात दर्शन दिया. उसके बाद महर्षि कात्यायन ने माता से वरदान मांगा कि वह उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें. मां भगवाती ने भी उन्हें वचन दिया कि वह उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लेंगी. एक बार तीनों लोकों पर महिषासुर नाम के एक दैत्य ने अत्याचर करना शुरु कर दिया. उसके अत्यचारों से तंग आकर सभी देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी से सहयता मंगी|
तब त्रिदेव के तेज से माता ने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया. इसलिए माता के इस स्वरूप को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है. माता के पुत्री के रूप में पधारने के बाद महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले उनकी पूजा की. तीन दिनों तक महर्षि की पूजा स्वीकार करने के बाद माता ने वहां से विदा ली और महिषासुर, शुंभ निशुंभ समेत कई राक्षसों के आतंक से संसार को मुक्त कराया. माता कात्यायनी को ही महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है|
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