धर्म-अध्यात्म

Buddha Purnima 2025: 12 मई को बुद्ध पूर्णिमा, पीपल के पेड़ की पूजा से दूर होंगे सभी दुख

Sarita
7 May 2025 8:54 AM IST
Buddha Purnima 2025: 12 मई को बुद्ध पूर्णिमा, पीपल के पेड़ की पूजा से दूर होंगे सभी दुख
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Buddha Purnima 2025: 2025 में बुद्ध पूर्णिमा 12 मई को पड़ रही है, जो सोमवार को आएगी। इस दिन का विशेष महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन शुभ योग भी बन रहे हैं, जो पूजा और अनुष्ठानों के लिए उत्तम समय प्रदान करते हैं। इस दिन विशेष रूप से पीपल के वृक्ष की पूजा का महत्व है। पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ है और इसे एक पवित्र वृक्ष माना जाता है। पीपल की पूजा करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि यह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली भी लाता है।
बुद्ध पूर्णिमा 2025 पर बन रहे शुभ योग
बुद्ध पूर्णिमा 2025 पर तीन महत्वपूर्ण शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा और व्रत के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। ये योग विशेष अवसर प्रदान करते हैं, जिससे इस दिन की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। रवि योग 12 मई 2025 को प्रातः 05 बजकर 32 मिनट से लेकर 06 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस समय में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है। दूसरा योग भद्रावास योग 12 मई को प्रातः 05 बजे से लेकर प्रातः 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस योग में कोई भी शुभ कार्य जैसे पूजा, व्रत या मांगलिक कार्य करना विशेष फलदायक माना जाता है। वहीं तीसरा योग वरीयान योग 12 मई 2025 को प्रातः 05:00 बजे से लेकर 13 मई प्रातः 05:52 तक रहेगा। वरीयान योग में विशेष पूजा और साधना करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
बुद्ध पूर्णिमा 2025 के दिन चन्द्रोदय सायं 06 बजकर 57 मिनट पर होगा। इस समय चंद्रमा का उदय होगा, और इस दौरान विशेष पूजा व अर्चना का महत्व बढ़ जाता है। चन्द्र अस्त अगले दिन प्रातः 05 बजकर 31 मिनट पर होगा। इस समय के बाद चंद्रमा अस्त होगा और पूजा का समापन किया जा सकता है।
बुद्ध पूर्णिमा पर पीपल के पेड़ की पूजा विधि:
बुद्ध पूर्णिमा के दिन सबसे पहले ताजे पानी से स्नान करें और शुद्धि की भावना से मन और शरीर को साफ करें।
पूजा के लिए सबसे पहले एक शुद्ध, स्वस्थ और हरा-भरा पीपल का पेड़ चुनें। यदि घर में पीपल का पेड़ नहीं है, तो नजदीकी मंदिर या पवित्र स्थान पर जाएं जहां पीपल का पेड़ हो।
पीपल के पेड़ के नीचे या उसके आस-पास एक साफ स्थान पर आसन बिछाकर बैठें और वहां दीपक, अगरबत्ती, फूल और चंदन रखें।
पीपल के पेड़ की जड़ में शुद्ध जल का छिड़काव करें। यह पेड़ के प्रति श्रद्धा और सम्मान दिखाता है।
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक और अगरबत्ती लगाएं। यह वातावरण को शुद्ध करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
पीपल के पेड़ पर ताजे फूल चढ़ाएं, खासकर सफेद और पीले रंग के फूल। ये शुभ फल प्रदान करते हैं और समृद्धि लाते हैं।
पीपल के पेड़ की पूजा करते समय भगवान बुद्ध की पूजा करें और विशेष रूप से "ॐ मणि पद्मे हूँ" का मंत्र जाप करें। यह मंत्र शांति और समृद्धि का प्रतीक है।
पीपल के पेड़ के नीचे दूध, शहद, घी और पानी का मिश्रण चढ़ाएं। यह विशेष रूप से बुद्ध पूजा के लिए शुभ होता है।
पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए एक बर्तन में पानी और फूल डालकर उसे चंद्रमा की ओर उछालें। यह चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने का एक तरीका है।
महिलाओं को इस दिन व्रत का संकल्प लेकर, चंद्र दर्शन के बाद पारण करना चाहिए। यह व्रत संतान सुख और दीर्घायु की प्राप्ति के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है।
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