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धर्म-अध्यात्म
Belpatra Todne ke Niyam: जानिए महाशिवरात्रि पर बिल्वपत्र तोड़ने को लेकर क्या हैं शास्त्रों में नियम
Sarita
14 Feb 2026 9:11 AM IST

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Belpatra Todne ke Niyam: फाल्गुन माह भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शिव भक्त व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है, लेकिन शास्त्रों और पुराणों में बेलपत्र तोड़ने को लेकर कुछ खास नियम भी बताए गए हैं। चलिए जानते हैं कि बेलपत्र तोड़ने को लेकर क्या नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है।
पूजा में बेलपत्र का महत्व:
भगवान शिव को प्रिय वस्तुओं में बेलपत्र प्रमुख है। इसे बिल्वपत्र भी कहा जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद पुष्प चढ़ाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। महाशिवरात्रि पर बेलपत्र अर्पित करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है।
इस दिन न तोड़ें बेलपत्र:
शास्त्रों के अनुसार सोमवार और चतुर्दशी तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। महाशिवरात्रि स्वयं चतुर्दशी को पड़ती है, इसलिए इस दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। आवश्यकता होने पर बेलपत्र एक दिन पहले तोड़कर रख लेना चाहिए। मान्यता है कि इन दिनों बेलपत्र तोड़ने से भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन करते हुए बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सोमवार को बेलपत्र तोड़ने की है मनाही:
सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित दिन है, लेकिन इसी दिन बेलपत्र तोड़ना निषिद्ध बताया गया है। मान्यता है कि सोमवार के दिन बेलपत्र में माता पार्वती का वास होता है। ऐसे में इस दिन पत्ते तोड़ना अनादर माना जाता है।
रविवार और द्वादशी तिथि का नियम:
स्कंद पुराण में यह उल्लेख मिलता है कि रविवार और दोनों पक्षों की द्वादशी तिथि को भी बेलपत्र तोड़ना वर्जित है। हालांकि, इन दिनों बेल वृक्ष की पूजा करना शुभ माना गया है। ऐसा करने से धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।
किसी भी माह की चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति तिथियों में भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इसके अलावा जब एक तिथि समाप्त होकर दूसरी शुरू हो रही हो, उस संधिकाल में भी बेलपत्र तोड़ना उचित नहीं माना गया है। प्रदोष व्रत, शिवरात्रि और सोमवार के दिन भी बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए।
बेलपत्र तोड़ते समय रखें इन बातों का ध्यान:
बेलपत्र तोड़ते समय पेड़ से कभी भी पूरी टहनी के साथ बेलपत्र न तोड़ें। एक-एक पत्ता तोड़ना शुभ माना जाता है।
बेलपत्र के पेड़ से पत्ते तोड़ने से पहले भगवान शिव का स्मरण जरूर करना चाहिए।
बेलपत्र लेने के बाद वृक्ष को नमस्कार जरूर अवश्य करें।
शिवजी को कम से कम एक बेलपत्र अर्पित किया जा सकता है। यदि संभव हो तो 11 या 21 की संख्या में भी चढ़ाया जा सकता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय याद रखें ये बातें
शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही अर्पित करना चाहिए। अगर 5 पत्तियों वाला बेलपत्र मिल जाए तो सोने पर सुहागा होगा। शिवलिंग पर साफ सुथरे, बगैर कटे-फटे और बगैर दाग धब्बों वाले बेलपत्र ही चढ़ाएं। बेलपत्र अर्पित करने से पहले अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें। कोशिश करें की हमेशा ताजे तोड़े हुए बेलपत्र ही पूजा में उपयोग करें। भूलकर भी मुरझाए और सूखे हुए बेलपत्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। शिवलिंग पर चढ़ाने से पहले बेलपत्र पर चंदन से ओम या श्रीराम लिखें। बेलपत्र शिवलिंग पर इस तरह चढ़ाएं कि उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करें और शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।
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