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धर्म-अध्यात्म
Belpatra Chadhane Ki Vidhi: जानें महाशिवरात्रि पर बिल्वपत्र अर्पित करने का सही तरीका और नियम
Sarita
15 Feb 2026 8:29 AM IST

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Belpatra Chadhane Ki Vidhi: भगवान शिव की पूजा बहुत सादी मानी जाती है। भोलेनाथ को केवल जल और बेलपत्र अर्पित करके प्रसन्न किया जा सकता है। शिव के भक्तों को पता होता है कि उनके आराध्य को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय हैं, लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि कौन सा बेलपत्र चढ़ाए और इसे अर्पित करने का सही तरीका क्या है, क्योंकि वे किसी भी तरह बेलपत्र चढ़ाकर इतिश्री कर लेते हैं। तो आइए जानते हैं कि बेलपत्र कैसे चढ़ाएं और कौन सा बेल पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए
शिवलिंग पर कैसे बेलपत्र चढ़ाएं?
बेलपत्र 1, 3 या फिर 5 पत्र वाला भी होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बेलपत्र जितने अधिक पत्र वाला होता है, उतना ही शुभ होता है। इसलिए शुभ काम में खासतौर पर शिव पूजा में हमेशा तीन पत्तों वाला बेलपत्र का उपयोग किया जाता है। 3 पत्तियों वाला बिल्वपत्र विषम संख्या जैसे 3, 7, 11 या 21, 51, 101 या इससे ज्यादा चढ़ाए जा सकते हैं।
शिव पूजा में हमेशा अच्छे बिल्वपत्र का उपयोग किया जाना चाहिए। कटे फटे और दाग धब्बों वाले बेलपत्र चढ़ाने से पूजा अधूरा मानी जाती है। टूटा या कटा बेलपत्र शिव जी को नहीं चढ़ाना चाहिए।
अखंड बेलपत्र चढ़ाने का ही फल प्राप्त होता है। केवल खानापूर्ति के लिए खराब बेलपत्र का भी उपयोग कर लेना सही नहीं माना जाता है। पीला या कीड़े-मकोड़ों से क्षतिग्रस्त बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।
यह कोशिश करें कि आप शिवलिंग पर हमेशा ताजे तोड़े हुए बेलपत्र ही चढ़ाएं, लेकिन किसी वजह से 2,3 दिन पहले वाले बेलपत्रों का उपयोग करना पड़ रहा है, तो उन्हें साफ और सुरक्षित स्थान पर संभालकर रखें।
शिव पूजा के लिए भूलकर भी मुरझाए और सूखे हुए बेलपत्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता है। बशर्ते वह सूखा न हो और मुरझाया हुआ न हो।
शिव भक्ति और भावना को अधिक महत्व देते हैं। अगर पूजा के लिए बेल पत्र नहीं हो तो शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र को फिर से चढ़ा जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि बेलपत्र कभी पुराना नहीं होता है। पहले चढ़ाया गया बेलपत्र अभी भी साफ, त्रिदली और अखंड अवस्था में है, तो उसे फिर उपयोग किया जा सकता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका:
बेलपत्र के पत्र में तीन से अधिक पत्तियां होने पर भी वे एक ही डंडी से जुड़ी होनी चाहिए।
शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित करने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करें और सभी बेलपत्रों पर चंदन से ओम, या श्रीराम लिखें।
बेलपत्र को अनामिका, अंगूठा और मध्यमा उंगली से पकड़कर चढ़ाएं। बीच की पत्ती को पकड़कर ही इसे शिवलिंग पर अर्पित करें।
बेलपत्र को हमेशा उलटा चढ़ाएं, जिससे कि बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
शिवलिंग की पूजा करते समय सही क्रम का ध्यान रखें। पहले शिवलिंग का जल से अभिषेक करें उसके बाद बेलपत्र चढ़ाएं न कि जलाभिषेक से पहले।
शिव जी को क्यों प्रिय है तीन पत्तों वाला बेलपत्र?
दरअसल, बेलपत्र के 3 पत्ते त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक माने जाता हैं। एक ही डंडी में जुड़े बेलपत्र के तीव पत्ते त्रिपुंड यानी कि 3 रेखाओं और त्रिगुणों, सत, रज और तम का भी प्रतीक माने जाते हैं। ये शिव जी के त्रिशूल का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। कहा जाता है कि बिल्वपत्र की ठंडी प्रकृति शिव की उग्र उर्जा को शीतल रखती है। ये हमारे शरीर की तीन प्रमुख अवस्थाओं वात, पित्त और कफ प्रकृति को भी दर्शाती हैं।
क्यों शिव जी को बेहद प्रिय है बिल्वपत्र:
इसका वर्णन पुराणों में मिलता है, जिसके अनुसार मां पार्वती ने शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस दौरान वे रोज शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करती थीं। ऐसा कहा जाता है कि मां गौरा ने ही सबसे पहले महादेव के चरणों में बेलपत्र चढ़ाए थे, उनकी सच्ची साधना और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने मां पार्वती की मनोकामना पूर्ण की थी। तभी से कहा जाता है कि भगवान शिव केवल जल और बेलपत्र से उपासना करने वाले भक्तों की भी अर्जी सुन लेते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से माता पार्वती का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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