धर्म-अध्यात्म

Basant Panchami 2026: जानें बसंत पंचमी के दिन मां की पूजा का महत्व

Sarita
22 Jan 2026 10:59 AM IST
Basant Panchami 2026: जानें बसंत पंचमी के दिन मां की पूजा का महत्व
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Basant Panchami 2026: हिंदू धर्म में माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, वाणी, बुद्धि, कला और रचना की देवी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सरस्वती की आराधना करने से वाणी में मधुरता आती है, ज्ञान में वृद्धि होती है, शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है, कार्यों में उन्नति होती है और बुद्धि का विकास होता है. हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. आइए जानते हैं माता के जन्म से जुड़ी पुराणों में वर्णित एक प्रचलित कथा|
मां सरस्वती की जन्म कथा:
देवी भागवत पुराण के अनुसार, बहुत समय पहले जब सृष्टि की रचना हुई, तब त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—ने मनुष्य और संसार की रचना की. संपूर्ण संसार बहुत शांत और सुंदर था, लेकिन फिर भी त्रिदेवों को लगता था कि उनकी रचना में कुछ कमी है. कारण यह था कि पूरे संसार में केवल शांति थी, कोई ध्वनि, कोई हलचल नहीं थी|
तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु और भगवान शिव से अनुमति ली और अपने कमंडल का जल वेद मंत्रों के साथ छिड़का. उसी से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई. यह शक्ति एक सुंदर चतुर्भुजी स्त्री के रूप में सामने आई. उनके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और आशीर्वाद की मुद्रा थी. यही थीं मां सरस्वती. त्रिदेवों ने माता का स्वागत किया और उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया. माता ने त्रिदेवों के आग्रह को स्वीकार किया और वीणा बजाना शुरू किया. जैसे ही मां सरस्वती ने वीणा के तार छेड़े, वैसे ही एक मधुर ध्वनि उत्पन्न हुई. यह ध्वनि धीरे-धीरे पूरे ब्रह्मांड—स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों में फैल गई|
इस मधुर संगीत को सुनकर सभी जीव-जंतु आनंदित हो उठे. जो संसार अब तक शांत और स्थिर था, उसमें चेतना, गति और जीवन का संचार हो गया. इसी कारण माता को ‘सरस्वती’, अर्थात प्रवाहित होने वाली शक्ति, कहा गया. कहा जाता है कि मां की वीणा से निकला पहला स्वर ‘सा’ था, जो संगीत के सात स्वरों में पहला है. इसी क्षण निशब्द ब्रह्मांड को ध्वनि मिली और भाषा व संगीत का जन्म हुआ|
धार्मिक मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा करने से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. कहा जाता है कि मां के आशीर्वाद से ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है, वाणी में मिठास आती है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है|
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