धर्म-अध्यात्म

Bajrang Baan Path: बजरंग बाण के नियमित पाठ से दूर होते हैं डर और संकट, संपूर्ण पाठ यहां पढ़ें

Sarita
29 Nov 2025 8:54 AM IST
Bajrang Baan Path: बजरंग बाण के नियमित पाठ से दूर होते हैं डर और संकट, संपूर्ण पाठ यहां पढ़ें
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Bajrang Baan Path: हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, साहस और भक्तों के संकट दूर करने वाले देवता माना जाता है। उन्हें रामभक्त और अंजनिपुत्र वीर के रूप में पूजा जाता है। हनुमानजी जल्दी प्रसन्न होने वाले और चिरंजीवी देवता हैं, जो आज भी इस पृथ्वी पर सशरीर विचरण करते हैं। उनके भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और उपासना करते हैं। संकट, भय, रोग या जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने के लिए हनुमानजी की आराधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
हनुमान चालीसा के पाठ के साथ बजरंग बाण का नियमित पाठ करना विशेष रूप से फलदायक माना जाता है। यह न केवल भक्त की मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक होता है, बल्कि कुंडली में मौजूद ग्रह दोष, विवाह में बाधाएं, गंभीर बीमारियां, कार्यक्षेत्र में रुकावटें और वास्तुदोष दूर करने में भी मदद करता है। समाज में मान-सम्मान बढ़ाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए बजरंग बाण का पाठ सबसे अचूक उपाय माना जाता है।
बजरंग बाण
||दोहा||
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
||चौपाई||
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जय हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥
||दोहा||
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
'तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।
बजरंग बाण पाठ से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ
बजरंग बाण का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से जीवन के कई कष्ट स्वतः दूर होने लगते हैं। यह न केवल शारीरिक रोगों से राहत दिलाता है, बल्कि सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने की शक्ति भी देता है। नियमित पाठ करने से भय, नकारात्मकता और चिंता समाप्त होती है तथा हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इसके साथ ही जीवन में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं, मन स्थिर और शांत रहता है तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और सफलता ये सभी लाभ बजरंग बाण के नियमित पाठ से सहज रूप में मिलते हैं।
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