धर्म-अध्यात्म

Astro Tips: जानें होलाष्टक, होलिका दहन, धुलेंडी और रंगपंचमी पर क्यों वर्जित है चौराहों को लांघना

Sarita
28 Feb 2026 8:37 AM IST
Astro Tips:  जानें होलाष्टक, होलिका दहन, धुलेंडी और रंगपंचमी पर क्यों वर्जित है चौराहों को लांघना
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Astro Tips: होलाष्टक के 8वें दिन होलिका दहन रहता है। इसके दूसरे दिन धुलेंडी और होलिका दहन के पांचवें दिन रंगपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दौरान चौहरों को पार करने से पहले कुछ सावधानियां रखना जरूरी है। इस दौरान चौराहा लांघना या गलत तरीके से पार करना कष्टकारी माना जाता है और यह स्वास्थ्य या दुर्भाग्य का कारण बन सकता है।
चौराहा लांघना क्यों वर्जित है?
1. भक्त प्रहलाद और कष्ट के 8 दिन: पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने इन 8 दिनों में अपने पुत्र प्रहलाद को भीषण यातनाएं दी थीं। इन दिनों को शोक और कष्ट का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण हिंदू धर्म में इन दिनों कोई भी शुभ कार्य (शादी, मुंडन, गृह प्रवेश) वर्जित होता है। जब वातावरण में कष्ट और दुख की स्मृतियां हों, तो असुरक्षित स्थानों (जैसे सुनसान चौराहे या तिराहे) पर जाना मानसिक रूप से भारी पड़ सकता है।
2. चौराहे का महत्व: जहां होलिका दहन के लिए लकड़ियां एकत्रित की जाती हैं, उस चौराहे पर नकारात्मक शक्तियां एकत्रित मानी जाती हैं, इसलिए वहां से गुजरने या लांघने से बचना चाहिए। होलाष्टक (होली से 8 दिन पहले) के दौरान नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के असंतुलन के कारण शुभ कार्य वर्जित होते हैं। होलाष्टक में ग्रहों की स्थिति अशुभ और ऊर्जा असंतुलित होती है, जिससे नकारात्मकता बढ़ती है।
3. टोने टोटके: तंत्र शास्त्र और लोक मान्यताओं के अनुसार, चौराहा एक ऐसी जगह है जहां चारों दिशाओं की ऊर्जाएं आपस में टकराती हैं। होलाष्टक के दौरान जब वातावरण में नकारात्मक शक्तियां अधिक प्रभावी मानी जाती हैं, तब लोग अपनी बाधाओं, नजर दोष या बीमारियों को दूर करने के लिए चौराहों पर 'टोटके' या पूजन सामग्री (जैसे उतारा, नींबू, सिंदूर, या बलि का भोजन) छोड़ते हैं। इसलिए उन्हें लांघना वर्जित माना गया है। यदि आप अनजाने में इन सामग्रियों को लांघते हैं या उन पर पैर रख देते हैं, या गाड़ी से उसे कुचल देते हैं, तो माना जाता है कि वह नकारात्मक ऊर्जा आपके साथ जुड़ सकती है। इसीलिए जब भी आप वहां से गुजर रहें हो, तो ध्यान रखें कि उस नींबू पर आपका पैर न पड़े या आपकी गाड़ी का पहिया न चढ़े। अन्यथा आप पर भी समस्या का प्रभाव हो सकता है।
4. ग्रहों का उग्र स्वभाव: होलाष्टक के इन 8 दिनों में आठ ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु) बेहद उग्र अवस्था में होते हैं। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों की इस उग्रता के कारण मनुष्य की निर्णय क्षमता कमजोर होती है और मानसिक अशांति बढ़ती है। चौराहों पर ग्रहों की यह नकारात्मक रश्मियां अधिक सक्रिय होती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए वहां से बचकर निकलने की सलाह दी जाती है।
5. मनोवैज्ञानिक और सुरक्षा का पहलू: पुराने समय में जब सड़कों पर रोशनी कम होती थी, तब चौराहों पर जंगली जानवरों या असामाजिक तत्वों का डर रहता था। साथ ही, होली की तैयारी के लिए लोग लकड़ियां और घास इकट्ठा करते थे, जिससे वहां गंदगी या चोट लगने का खतरा रहता था। 'लांघने' की मनाही असल में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती थी।
होलाष्टक में खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
समय का ध्यान: सूर्यास्त के समय और देर रात को चौराहों पर रुकने या वहां खड़े होकर गपशप करने से बचें।
नजर रखें: यदि जमीन पर कोई विशेष सामग्री (जैसे फूल, नींबू, भूरा कद्दू, पत्तल पर रखा भोजन, कोयला या सफेद कपड़ा) दिखे, तो उससे दूरी बनाकर निकलें।
मंत्र शक्ति: यदि डर लगे या किसी ऐसी जगह से गुजरना पड़े, तो ॐ नमः शिवाय, ॐ हनुमते नम: या हनुमान चालीसा का मानसिक पाठ करते रहें।
गर्भवती महिला रहें सावधान: यदि कोई महिला गर्भवती है, तो उसे सड़क पर पड़े हुए नींबू से अधिक सावधान रहना चाहिए। गर्भवती महिला का नींबू को लांघना, गर्भपात का कारण बन सकता है। गर्भवती महिला को अपने हाथ से नींबू काटना भी नहीं चाहिए।
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