धर्म-अध्यात्म

Apra Ekadashi 2025 : क्यों मनाया जाता है अपरा एकादशी व्रत जानें सही तिथि

Sarita
8 May 2025 10:13 AM IST
Apra Ekadashi 2025 : क्यों मनाया जाता है अपरा एकादशी व्रत जानें सही तिथि
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Apra Ekadashi 2025 : भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत प्रत्येक माह में दो बार रखा जाता है यानी की साल में कुल 24 बार. वहीं जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में अपरा एकादशी का व्रत किया जाता है. कहते हैं एकदाशी तिथि भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है. वहीं इस दिन विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की पूजा करने वाले को शुभ फलों की प्राप्ति होती है|
कब है अपरा एकादशी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की शुरुआत 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट 12 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 23 मई को रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा|
अपरा एकादशी का व्रत क्यों किया जाता है:
अपरा एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय में युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का महत्व बताने का निवेदन किया. तब भगवान कृष्ण ने अपरा एकादशी व्रत को करने से प्रेत योनि, ब्रह्म हत्या आदि से मुक्ति मिलती है, इस बारे में बताया. भगवान कृष्ण ने पौराणिक कथा का वर्णन किया. जिसके अनुसार प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा हुआ करता था. वहीं उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा ही क्रूर और अधर्मी था. वह अपने बड़े भाई महीध्वज से घृणा और द्वेष करता था.राज्य पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए एक रात उसने अपने बड़े भाई की हत्या कर दी, और उसकी लाश को जंगल में पीपल के नीचे गाड़ दिया|
राजा महीध्वज अकाल मृत्यु के कारण प्रेत योनि में प्रेत आत्मा बनकर उस पीपल के पेड़ पर रहने लगे. एक बार उस रास्ते से धौम्य ऋषि निकल रहे थे. उन्होंने राजा को प्रेत बने हुए देख लिया और अपनी माया से उसके बारे में सब कुछ पता कर लिया. ऋषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया.राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए ऋषि ने अपरा एकादशी व्रत रखा था, और श्री हरि विष्णु से राजा के लिए कामना की थी. इस पुण्य के प्रभाव से राजा की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई. राजा बहुत खुश हुआ और महर्षि को धन्यवाद देता हुआ स्वर्ग लोक में चला गया|
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