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धर्म-अध्यात्म
Apara Ekadashi 2025: आज अपरा एकादशी पर करें ये 6 शुभ कार्य, मिलेगा अपार फल और दुखों से मिलेगी मुक्ति
Sarita
23 May 2025 7:41 AM IST

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Apara Ekadashi 2025: शास्त्रों में, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा गया हैं। इसे भद्रकाली एकादशी या जलक्रीड़ा एकादशी भी कहा जाता है। “अपरा” का अर्थ है अपार फल देने वाली। इस दिन भगवान विष्णु संग माँ लक्ष्मी और देवी दुर्गा के स्वरुप मां भद्रकाली की आराधना विशेष पुण्यदायक मानी गई है। अपरा एकादशी व्रत का पालन करने वाले मनुष्य सद्गति को प्राप्त होते हैं। इस व्रत को करने से चित्त की शुद्धि होती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।
1. भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं और तुलसी अर्पित करें:
एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पीले फूल, तुलसीदल और पीले वस्त्र अर्पित करें। फिर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जप करें। यह उपाय अपार पुण्य देने वाला माना जाता है।साथ में लक्ष्मीजी का पूजन करें।
2. मां भद्रकाली को लाल फूल और अक्षत अर्पित करें:
इस दिन मां दुर्गा के भद्रकाली रूप की पूजा करने से भय, रोग और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। लाल फूल, रोली, अक्षत और चूड़ियां अर्पित करें। मां को हलवा या गुड़-चने का भोग लगाएं और यथाशक्ति देवी के मंत्रों का जप करें।
3. घर के पूजा स्थल में बनाएं जलक्रीड़ा की झांकी:
इस दिन भगवान विष्णु के जलक्रीड़ा स्वरूप को ध्यान में रखते हुए घर के पूजा स्थान में एक छोटी सी झांकी बनाएं। किसी पात्र में जल भरकर उसमें छोटी लकड़ी की नौका रखें और उस पर भगवान विष्णु व लक्ष्मीजी की छोटी प्रतिमा या चित्र रखें। इसे दीपक व फूलों से सजाएं। यह उपाय धन, सुख और शुभता को आकर्षित करता है।
4. गंगाजल से पूरे घर में छिड़काव करें:
जल तत्व की शुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा को हटाने के लिए इस दिन गंगाजल में थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करें। विशेष रूप से पूजास्थल, मुख्य द्वार और रसोई में छिड़कने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।
5. पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और विष्णु मंत्र का जप करें:
शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं और 108 बार ‘ॐ वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जप करें। पीपल में विष्णु का वास माना गया है। यह उपाय पूर्व जन्मों के पापों का क्षय करता है।
6. निर्धनों को जल और छाते का दान करें:
ज्येष्ठ माह में गर्मी अधिक होती है और जलक्रीड़ा एकादशी का संबंध जल तत्व से है। अतः इस दिन ठंडे पानी, शरबत या जलपात्र का दान करें। यदि संभव हो तो छाता या कपड़े का दान करें। इससे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पितृ दोष भी शांत होता है।
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