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धर्म-अध्यात्म
Anant Chaudas 2025: अनंत चतुर्दशी पर क्यों पहना जाता है अनंत,इसमें क्यों बांधते हैं 14 गांठें
Sarita
6 Sept 2025 9:37 AM IST

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Anant Chaudas 2025: अनंत चौदस पर अनंत सूत्र बांधना भगवान विष्णु के प्रति भक्ति और उनके अनंत स्वरूप में आस्था का प्रतीक है। यह सूत्र सुरक्षा, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। 14 गांठें इस सूत्र को और भी पवित्र बनाती हैं, जो भगवान विष्णु के 14 लोकों, गुणों और अनंतता का प्रतीक है। इस वर्ष 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी पर भक्तों को पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा का पालन करना चाहिए और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। स्थानीय पंडित या पंचांग से शुभ मुहूर्त की पुष्टि करें ताकि पूजा और सूत्र बांधने की प्रक्रिया विधि-विधान के अनुसार हो सके।
अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र क्यों पहना जाता है?
अनंत सूत्र भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक है। 'अनंत' शब्द का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं है, और यह भगवान विष्णु की अनंतता, शाश्वतता और सर्वव्यापी स्वरूप को दर्शाता है। अनंत चतुर्दशी पर इस सूत्र को बांधने की परंपरा के पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं।
सुरक्षा और सुख-समृद्धि:
अनंत सूत्र बांधने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन में सुरक्षा, सुख, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति प्रदान करता है। यह सूत्र नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और परिवार की खुशहाली सुनिश्चित करता है।
पौराणिक कथा:
अनंत चतुर्दशी की परंपरा महाभारत काल से चली आ रही है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार गए, तो भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत सूत्र बांधने की सलाह दी। इस सूत्र को बांधने से पांडवों को अपनी खोई हुई समृद्धि और शक्ति वापस मिल गई। यह सूत्र भगवान विष्णु के अनंत रूप का प्रतीक है, जो भक्तों को संकटों से बचाता है।
आध्यात्मिक बंधन:
अनंत सूत्र भक्त और भगवान के बीच एक आध्यात्मिक बंधन का प्रतीक है। इसे बांधकर, व्यक्ति अपना जीवन भगवान विष्णु की भक्ति और उनके मार्गदर्शन में समर्पित करता है। यह भक्त को अनंत काल तक भगवान की कृपा प्राप्त करने का आश्वासन देता है।
व्रत का एक भाग:
अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने वाले भक्त पूजा के बाद यह सूत्र बांधते हैं। यह भगवान विष्णु और उनके 14 अवतारों (मत्स्य, कूर्म, वराह आदि) को समर्पित व्रत और पूजा का एक अभिन्न अंग है।
अनंत सूत्र में 14 गांठें क्यों लगाई जाती हैं?
अनंत सूत्र में 14 गांठें बांधने का विशेष धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व है। ये गांठें निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण हैं:
14 लोकों का प्रतीक:
हिंदू धर्म में, संसार को 14 लोकों (सात ऊपरी और सात निचले) में विभाजित किया गया है। ये हैं: भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक, सत्यलोक (ऊपरी लोक) और अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल (निचला लोक)। अनंत सूत्र की 14 गांठें इन 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं, जो भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता और उनके जगतरक्षक रूप को दर्शाती हैं।
14 गुणों का प्रतीक:
कुछ मान्यताओं के अनुसार, ये 14 गांठें मानव जीवन के 14 गुणों या सिद्धांतों (जैसे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, सत्य, दया आदि) का प्रतिनिधित्व करती हैं। सूत्र बांधकर व्यक्ति अपने जीवन में इन गुणों को अपनाने का संकल्प लेता है।
14 अवतारों का प्रतीक:
भगवान विष्णु के अनेक अवतारों में से, कुछ विद्वानों का मानना है कि 14 गांठें प्रतीकात्मक रूप से उनके विभिन्न अवतारों (जैसे दशावतार और अन्य रूपों) का प्रतिनिधित्व करती हैं। इससे भक्त को उनके सभी रूपों की कृपा प्राप्त होने का आश्वासन मिलता है।
पूर्णता का प्रतीक:
कई परंपराओं में 14 अंक को पूर्णता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। 14 गांठें बांधने से सूत्र में एक विशेष ऊर्जा और पवित्रता आती है, जो इसे और अधिक शक्तिशाली बनाती है।
अनंत सूत्र बांधने की विधि:
सामग्री: अनंत सूत्र आमतौर पर रेशम या सूती धागे से बनाया जाता है, जिसे कुमकुम, हल्दी और केसर से रंगा जाता है। इसमें पहले से 14 गांठें लगाई जाती हैं।
पूजा: अनंत चतुर्दशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की पूजा करें। पूजा में पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य (प्रसाद) अर्पित करें।
बाँधने की विधि: पुरुष अपने दाहिने हाथ में और महिलाएँ अपने बाएँ हाथ में अनंत सूत्र बाँधती हैं। इसे बाँधते समय मंत्रों का जाप करें, जैसे
ॐ अनंताय नमः या ॐ नमो भगवते अनंताय।
व्रत और नियम: व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें और नमक का सेवन न करें। पूजा के बाद प्रसाद बाँटें।
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