धर्म-अध्यात्म

Anant chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी पर धागे में लगाई जाती हैं 14 गांठें, क्या है वजह

Sarita
2 Sept 2025 11:30 AM IST
Anant chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी पर धागे में लगाई जाती हैं 14 गांठें, क्या है वजह
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Anant chaturdashi 2025: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन गणपति विसर्जन के साथ-साथ भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और समस्त दुखों का अंत होता है. पंचांग के अनुसार, इस साल अनंत चतुर्दशी का पर्व 6 सितंबर को मनाया जाएगा|
अनंत चतुर्दशी का सबसे विशेष अनुष्ठान है अनंत सूत्र यानी 14 गांठों वाला पवित्र धागा. इसे हाथ में बांधा जाता है और यही धागा जीवन में शुभता, समृद्धि और रक्षा का प्रतीक माना जाता है. लेकिन आखिर क्या वजह हैं जो अनंत चतुर्दशी के दिन 14 गांठों वाला धागा पहना जाता है|
14 गांठें, किसका प्रतीक हैं:
अनंत चतुर्दशी पर बांधे जाने वाले इस धागे में लगी 14 गांठें (जिन्हें ‘अनंत सूत्र’ भी कहा जाता है) कई महत्वपूर्ण चीजों का प्रतीक मानी जाती हैं. हालांकि, सबसे आम और प्रमुख मान्यता के अनुसार, ये 14 गांठें भगवान विष्णु के 14 नामों का प्रतिनिधित्व करती हैं. ये नाम उनके विभिन्न रूपों और शक्ति को दर्शाते हैं. इसके अलावा, कुछ मान्यताओं के अनुसार, इन गांठों का संबंध 14 लोकों (भुवन) से भी है, जिन्हें हिंदू धर्म में ब्रह्मांड के विभिन्न स्तर माना गया है. ये 14 लोक हैं|
अतल
वितल
सुतल
तलातल
महातल
रसातल
पाताल
भूलोक
भुवर्लोक
स्वार्लोक
महर्लोक
जनर्लोक
तपोलोक
सत्यलोक
यह भी माना जाता है कि ये 14 गांठें 14 वर्षों तक राज करने के बाद भगवान राम के वनवास से लौटने का प्रतीक हैं. यह सूत्र जीवन में अनंत सुख, समृद्धि और सुरक्षा की कामना के लिए भी धारण किया जाता है|
अनंत चतुर्दशी के दिन, सुबह स्नान करने के बाद, भगवान विष्णु की अनंत रूप में पूजा की जाती है. सबसे पहले एक चौकी पर कलश स्थापित किया जाता है. इसके बाद, भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखकर, उनके सामने 14 गांठों वाले धागे को रखा जाता है. इस धागे को कच्चे सूत या रेशम से बनाया जाता है, जिसमें हल्दी और कुमकुम लगाया जाता है. पूजा के दौरान, ‘ॐ अनंताय नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है. पूजा के बाद, इस धागे को घर के मुखिया या परिवार के सदस्य अपनी कलाई पर बांधते हैं, और यह धागा साल भर बंधा रहता है. यह धागा भगवान विष्णु की अनंत कृपा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है|
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