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धर्म-अध्यात्म
Mahamrityunjaya Mantra की अद्भुत शक्ति: जब यमराज भी रह गए थे असहाय
Tara Tandi
15 Jun 2025 11:47 AM IST

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Mahamrityunjaya Mantra ज्योतिष न्यूज़: शास्त्रों में भगवान शिव शंकर के कई चमत्कारी मंत्रों का उल्लेख किया गया है। इन्हीं में से एक है महामृत्युंजय मंत्र। इस मंत्र को बहुत शक्तिशाली माना जाता है। कहा जाता है कि अगर इस मंत्र का एक निश्चित संख्या में जाप किया जाए तो पुराने से पुराने और असाध्य रोग भी टल जाते हैं। साथ ही यह भी कहा जाता है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का खतरा भी टल जाता है। अगर किसी की कुंडली में अकाल मृत्यु की आशंका है तो उसे महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। इसके जाप से व्यक्ति को लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही भगवान शिव की कृपा से यमराज भी ऐसे व्यक्ति को कोई कष्ट नहीं देते हैं। आइए जानते हैं महामृत्युंजय मंत्र की रचना कैसे हुई और इस मंत्र को इतना प्रभावशाली क्यों माना जाता है...
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ऋषि मृकंडु ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ऋषि मृकंडु को इच्छानुसार संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ समय पश्चात ऋषि मृकंडु को पुत्र की प्राप्ति हुई। पुत्र के जन्म के पश्चात ऋषियों ने बताया कि इस बालक की आयु मात्र 16 वर्ष होगी। यह सुनते ही ऋषि मृकंडु दुख से घिर गए।
जब ऋषि मृकंडु की पत्नी ने अपने पति को चिंताओं से घिरा देखकर उनसे दुख का कारण पूछा तो उन्होंने पूरी कहानी बताई। इस पर उनकी पत्नी ने कहा कि यदि भगवान शिव आशीर्वाद दें तो यह विधान भी टल जाएगा। ऋषि ने अपने पुत्र का नाम मार्कंडेय रखा और उसे शिव मंत्र भी दिया। मार्कंडेय हमेशा शिव भक्ति में लीन रहते थे। समय बीतता गया और मार्कंडेय बड़े हो गए। जब समय निकट आया तो ऋषि मृकंडु ने अपने पुत्र मार्कंडेय को अल्पायु होने की बात बताई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि भगवान शिव चाहेंगे तो इसे टाल देंगे।तब अपने माता-पिता का दुख दूर करने के लिए मार्कंडेय भगवान शिव से लंबी आयु का वरदान पाने के लिए प्रार्थना करने लगे। भगवान शिव की आराधना करने के लिए मार्कण्डेय ने महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठकर इसका निरंतर जाप करने लगे।
महामृत्युंजय मंत्र- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
जब मार्कण्डेय की आयु पूरी हो गई तो यमदूत उनके प्राण लेने आए, लेकिन उस समय मार्कण्डेय भगवान शिव की तपस्या में लीन थे। यह देखकर यमदूत वापस यमराज के पास गए और वापस आकर उन्हें पूरी बात बताई। इसके बाद यमराज स्वयं मार्कण्डेय के प्राण लेने आए। जैसे ही उन्होंने मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए उन पर अपना पाश डाला, बालक मार्कण्डेय शिवलिंग से लिपट गए।
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