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धर्म-अध्यात्म
Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर विवाह करना क्यों है शुभ
Sarita
8 April 2025 12:39 PM IST

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Akshaya Tritiya 2025: यह कोई साधारण तिथि नहीं, बल्कि ऐसा दुर्लभ क्षण है, जो स्वयं शुभता का प्रतीक बन चुका है। यही कारण है कि विवाह जैसे जीवन के सबसे पवित्र बंधन के लिए यह दिन विशेष रूप से चुना जाता है। अक्षय का मतलब होता है, कभी नहीं खत्म होने वाला। न उसका प्रभाव, न उसका फल, न उसका स्मरण। इसलिए इस विशेष तिथि पर ज्यादातर लोग विवाह के पवित्र बंधन में बंधते हैं। तो आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अक्षय तृतीया पर शादी के बंधन में बंधना कितना शुभ माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
क्या है अक्षय तृतीया से जुड़ी कथा?
भारतीय संस्कृति और पुराणों में अक्षय तृतीया का काफी महत्व है। त्रेता युग की शुरुआत इसी तिथि से मानी जाती है। यही वह दिन है जब भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया और धर्म की फिर से स्थापना की थी। यही नहीं, इसके अलावा एक और कथा है कि इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था, जिससे प्रेम का यह दिन और भी विशेष बन जाता है।
विवाह के लिए शुभ है तिथि?
ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है कि इस दिन विवाह करने के लिए किसी ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं मानी जाती, क्योंकि यह खुद में एक पूर्ण मुहूर्त है। इसे अबूझ मुहूर्त कहा गया है, यानी वह घड़ी जिसमें कोई कार्य किया जाए, वह शुभता से भरा होता है। विवाह खुद में एक यज्ञ है, उस यज्ञ में जब यह दिन समर्पित होता है, तो जीवन के हर एक पहलू में सौभाग्य के फूल खिल उठते हैं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की रहती है विशेष कृपा
कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा विशेष रूप से पृथ्वी पर बरसती है। जब दो जीवन इस दिन एक-दूसरे से जुड़ते हैं तो वह संबंध केवल सांसारिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक स्तर पर भी बंध जाता है। ऐसा संबंध, जिसमें प्रेम के साथ-साथ लक्ष्मी का वास और जीवन की समृद्धि भी शामिल होती है।
अक्षय तृतीया का यह है महत्व
अक्षय तृतीया केवल एक तारीख नहीं, यह एक शुभता का मार्ग है। एक ऐसा मार्ग जो भाग्य, भक्ति और ब्रह्म की त्रिवेणी से होकर गुजरता है। और जब कोई जोड़ा इस पावन दिन पर अपने जीवन की नई शुरुआत करता है, तो उनका मिलन किसी वरदान से कम नहीं होता। एक ऐसा वरदान जो काल से परे होता है और जिसे समय भी भूल नहीं पाता।
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