धर्म-अध्यात्म

Ahoi Ashtami 2025: व्रत तिथि, पूजा विधि और संतान की दीर्घायु का मंत्र

Harrison
11 Oct 2025 7:36 PM IST
Ahoi Ashtami 2025: व्रत तिथि, पूजा विधि और संतान की दीर्घायु का मंत्र
x
Religion Spirituality धर्म अध्यात्म : धार्मिक कल्पना और मातृ ममत्व का सुंदर पर्व अहोई अष्टमी इस वर्ष 13 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा, जब कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। यह व्रत विशेष रूप से मायें संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए रखती हैं।
पंचांग अनुसार, अष्टमी तिथि 13 अक्तूबर की दोपहर 12:24 बजे प्रारंभ होगी और 14 अक्तूबर की सुबह 11:09 बजे तक चलेगी।
पूजा मुहूर्त शाम 5:53 बजे से लेकर 7:08 बजे तक माना गया है।
तारों को अर्घ्य देने की पूजा का समय 6:17 बजे के आस-पास है।
📿 पूजा विधि (Puja Vidhi) और अनुष्ठान
अहोई अष्टमी व्रत विधि बहुत ही सरल और श्रद्धापूर्ण है। नीचे इसका क्रम दिया गया है:
सुबह की तैयारी और संकल्प
व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्वच्छ स्नान करें। सफ़ाई करके पूजा स्थान तैयार करें। व्रती माएँ निर्जला व्रत (भोजन और जल ग्रहण न करना) का संकल्प लें।
अहोई माता की प्रतिमा या चित्र लगाना
कुमकुम या मिट्टी से दीवार पर या पूजा स्थान पर अहोई माता की आकृति बनाएँ। साथ ही एक कलश जल से भरकर लाल कपड़े से ढकें।
पूजा सामग्री
पूजा में उपयोग करें:
रोली, अक्षत (चावल)
फूल, Incense (धूप)
दीपक (घी में)
दूध, हल्दी, गुड़
प्रसाद — हलवा, फल, अन्य मीठा
करवा (पात्र)
शाम को पूजा और अर्घ्य
शाम के समय, जब तारे प्रकट हों, व्रती माता Ahoi को फूल, रोली, अक्षत अर्पित करें। दीपक जलाएँ और व्रत कथा सुनें या पाठ करें। इसके बाद तारों को अर्घ्य दें।
कुछ लोग चंद्रमा दिखने पर भी पूजा करते हैं।
उपवास तोड़ना
व्रत तोड़ने के लिए माता संतान को दूध, हलवा, फल आदि खिलाती हैं और परिवार के साथ भोजन कर वह व्रत पूर्ण करती हैं।
🕉️ मंत्र और कथा
गायन करने वाला मंत्र अक्सर होता है: “ॐ ऐं होई माता नमः”
पूजा के दौरान, अहोई अष्टमी व्रत कथा पढ़ने या सुनने का विशेष महत्व है।
कुछ श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी 108 बार करते हैं, जिससे संतान की रक्षा और दीर्घायु की प्रेरणा मानी जाती है।
🌟 महत्व और लाभ
अहोई अष्टमी का व्रत मातृ श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक है। इस व्रत को श्रद्धा से रखने वाले माएँ अपने संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
यह व्रत उनके लिए भी शुभ है जो संतान की चाह रखते हों या जिनकी संतान को आशीर्वाद की आवश्यकता हो।
मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत करने पर यह एक सुरक्षा कवच बन जाता है, जो संतान को बुरी शक्तियों से बचाता है।
यदि आप चाहें, तो मैं आपके लिए पूजा कथा (व्रत कथा), विशेष उपाय (उपाय) और व्रत पालन के नियम (क्या करें और क्या न करें) भी भेज सकता हूँ, ताकि आपके व्रत का आयोजन पूर्ण और सफल हो सके।
Next Story