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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: इस वर्ष दीपावली का पर्व विशेष संयोग के चलते पांच नहीं, बल्कि पूरे **छह दिनों** तक मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार तिथियों में हुए अंतर और धार्मिक मान्यताओं के कारण दीपोत्सव की शुरुआत 28 अक्टूबर 2025 से होगी और यह 2 नवम्बर 2025 तक चलेगा। आमतौर पर दीपावली का त्योहार पांच दिनों का होता है, लेकिन इस बार एक अतिरिक्त दिन **‘राम विवाह’** या **‘चौमुखी दीपावली’** के रूप में जोड़ा गया है, जिसे कुछ क्षेत्रों में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
भारत में दीपावली न केवल दीपों का त्योहार है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, परंपरा, संस्कृति और परिवारिक मूल्यों का प्रतीक है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर जाने, बुराई पर अच्छाई की जीत और नई शुरुआत का संदेश देता है। आइए जानते हैं इस वर्ष के छह दिवसीय दीपोत्सव के हर दिन का महत्व:
1. धनतेरस (28 अक्टूबर 2025, मंगलवार)
दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे **धन त्रयोदशी** भी कहा जाता है। इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। लोग इस दिन बर्तन, सोना, चांदी या अन्य मूल्यवान वस्तुएं खरीदते हैं। यह दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की कामना के लिए मनाया जाता है। साथ ही वैद्य, डॉक्टर, और व्यापारी वर्ग इस दिन विशेष पूजा करते हैं।
2. रूप चौदस / नरक चतुर्दशी (29 अक्टूबर 2025, बुधवार)
इस दिन को **नरक चतुर्दशी** और **काली चौदस** के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, जिससे 16,000 कन्याओं को मुक्त किया गया था। इस दिन विशेष रूप से तिल और उबटन से स्नान करने की परंपरा है, जिसे ‘नरक स्नान’ कहा जाता है। महिलाएं इस दिन सौंदर्य और स्वास्थ्य की कामना के लिए पूजा करती हैं।
3. दीपावली / लक्ष्मी पूजन (30 अक्टूबर 2025, गुरुवार)
दीपोत्सव का मुख्य पर्व **दीपावली** इस दिन मनाया जाएगा। इसे **अमावस्या की रात** को मनाया जाता है जब लोग घरों को दीपों, मोमबत्तियों और झालरों से सजाते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है। व्यापारी वर्ग के लिए यह दिन नया वित्तीय वर्ष शुरू करने का होता है। घर-घर में मिठाइयों का आदान-प्रदान, पटाखों की गूंज और रोशनी की जगमगाहट इस पर्व को विशेष बनाती है।
4. गोवर्धन पूजा (31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार)
दीपावली के अगले दिन **गोवर्धन पूजा** का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव के अभिमान को चूर करने की लीला को समर्पित है। गांवों और कई मंदिरों में **अन्नकूट महोत्सव** आयोजित किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को भोग अर्पित किया जाता है।
5. भाई दूज (1 नवम्बर 2025, शनिवार)
भाई दूज भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई बहनों को उपहार देते हैं। यह पर्व रक्षाबंधन के समान भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
6. राम विवाह / चौमुखी दीपावली (2 नवम्बर 2025, रविवार)
इस बार का विशेष आकर्षण है छठा दिन — **राम विवाह**। इसे कुछ क्षेत्रों में **चौमुखी दीपावली** भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। खासकर उत्तर भारत और मिथिला क्षेत्र में यह पर्व बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है। इस दिन विवाह गीत, रामायण पाठ और विशेष पूजन होते हैं। कुछ स्थानों पर चारों दिशाओं में दीप जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
दीपावली केवल एक दिन का नहीं, बल्कि संस्कारों और संस्कृति का उत्सव है जो अब छह दिन तक चलेगा। यह पर्व हर वर्ग और आयु के लोगों को जोड़ता है — आस्था, उल्लास और प्रकाश के संग। इस वर्ष दीपोत्सव में एक अतिरिक्त दिन जुड़ने से श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना हो गया है। तैयार रहें इस रोशनी, प्रेम और शुभता के पर्व को और भी धूमधाम से मनाने के लिए!
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