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धर्म-अध्यात्म
Adhik Maas 2026: नया साल होगा 13 महीने का, ज्येष्ठ मास दो बार आएगा
Harrison
26 Nov 2025 7:51 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म: साल 2026 के हिन्दू पंचांग में एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है, जो सामान्य कैलेंडर साल से अलग है। आमतौर पर हिन्दू कैलेंडर में 12 महीने होते हैं, लेकिन 2026 में साल में 13 महीने होंगे। इस अतिरिक्त महीने को अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
अधिकमास का महत्व हिन्दू धर्म और पंचांग के अनुसार बहुत खास माना जाता है। यह महीना सूर्य और चंद्रमा की चाल में होने वाले अंतर के कारण आता है। साधारण रूप से एक वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन जब चंद्रमास और सूर्यमास का अंतर पैदा होता है, तो यह महीना जन्म लेता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास दो बार आएगा, इसलिए इसे अधिकमास कहा जा रहा है।
हिंदू पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत, पूजा और दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। खासकर पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिकमास के रूप में मनाया जाता है, उसमें किए गए धार्मिक अनुष्ठान और त्यौहार अत्यधिक फलदायक माने जाते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकमास का महीना सामान्य महीनों की तुलना में धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल होता है। इस महीने में किए गए अनुष्ठानों से मन और आत्मा दोनों को शांति मिलती है। लोग इस महीने में विशेष रूप से दान, सेवा और पूजा में अधिक समय देते हैं।
हिंदू कैलेंडर में अधिकमास का आगमन ज्येष्ठ मास के दौरान होगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस महीने में किए जाने वाले धार्मिक कर्मों का महत्व अन्य महीनों से अधिक माना जाता है। इस दौरान व्रत रखने, मंदिरों में विशेष पूजा करने और जरूरतमंदों की सहायता करने का विशेष महत्व है।
खगोलशास्त्रियों का कहना है कि इस वर्ष में सूर्य और चंद्रमा के बीच की स्थिति में ऐसा अंतर होगा कि ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। इसका प्रभाव धार्मिक आयोजन, त्यौहार और पर्वों पर भी पड़ेगा। इस वजह से कई हिन्दू परिवार इस महीने को विशेष महत्व देंगे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उत्सव मनाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकमास का यह महीना आध्यात्मिक रूप से अपने जीवन में नई ऊर्जा लाने का अवसर है। इस दौरान किए गए व्रत, यज्ञ और दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही, यह महीना अपने स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर ध्यान देने का भी अच्छा समय माना जाता है।
हिंदू धर्मग्रंथों में अधिकमास के महत्व को कई जगहों पर वर्णित किया गया है। इसे शुभ मास माना गया है और इस समय किए गए धार्मिक कर्मों का फल जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति के रूप में प्राप्त होता है।
2026 में ज्येष्ठ मास के दो बार आने से न केवल धार्मिक उत्सवों और व्रतों में बदलाव आएगा, बल्कि यह समय लोगों को अपने जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी देगा। लोग इस मौके पर विशेष पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और जरूरतमंदों की सेवा करके पुण्य कमाएंगे।
इस तरह, साल 2026 हिन्दू पंचांग में अपने 13 महीनों के साथ एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वर्ष साबित होगा। अधिकमास की यह घटना हर व्यक्ति के जीवन में धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है।
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