धर्म-अध्यात्म

गणपति के 1000 से ज्यादा स्वरूप अब बनेगा अनोखा संग्रहालय

nidhi
19 Sept 2026 8:41 AM IST
गणपति के 1000 से ज्यादा स्वरूप अब बनेगा अनोखा संग्रहालय
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आस्था का अद्भुत संग्रह गणपति
जबलपुर: भगवान गणेश के प्रति आस्था और वर्षों के समर्पण से तैयार एक अनोखा संग्रह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां भगवान गणेश की एक-दो नहीं बल्कि 1000 से ज्यादा अलग-अलग स्वरूपों वाली प्रतिमाएं और कलाकृतियां संग्रहित की गई हैं। आकार, बनावट और सामग्री के लिहाज से एक-दूसरे से अलग इन गणेश प्रतिमाओं के इस विशाल संग्रह को अब व्यवस्थित संग्रहालय का स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है।
इस अनूठे संग्रह में भगवान गणेश के अनेक रूप देखने को मिलते हैं। कहीं गणपति ध्यान मुद्रा में हैं तो कहीं नृत्य करते हुए दिखाई देते हैं। कुछ प्रतिमाओं में भगवान गणेश पारंपरिक स्वरूप में नजर आते हैं तो कुछ में कलाकारों की रचनात्मकता देखने को मिलती है। छोटी से छोटी प्रतिमा से लेकर आकर्षक आकार वाली मूर्तियों तक इस संग्रह में गणेशजी के अलग-अलग रूपों को सहेजकर रखा गया है।
संग्रह की खासियत केवल प्रतिमाओं की संख्या नहीं बल्कि उनमें इस्तेमाल की गई अलग-अलग सामग्री भी है। धातु, पत्थर, लकड़ी, मिट्टी, कांच और अन्य वस्तुओं से निर्मित गणेश प्रतिमाएं इसमें शामिल हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों की कला और संस्कृति की झलक भी कई प्रतिमाओं में देखने को मिलती है। कुछ प्रतिमाएं उपहार के रूप में मिलीं तो कई को अलग-अलग स्थानों से वर्षों के दौरान एकत्र किया गया।
गणेश प्रतिमाओं को सहेजने का यह सिलसिला एक सामान्य धार्मिक रुचि से शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ संग्रह लगातार बढ़ता गया। नई और अनोखी गणेश प्रतिमा दिखाई देने पर उसे संग्रह में शामिल करने की कोशिश की गई। धीरे-धीरे संख्या सैकड़ों से बढ़कर एक हजार के पार पहुंच गई। अब यह व्यक्तिगत संग्रह आस्था के बड़े केंद्र का रूप ले चुका है।
इस संग्रह को देखने आने वाले लोगों के लिए भी भगवान गणेश के इतने अलग-अलग स्वरूप एक साथ देखना खास अनुभव है। हर प्रतिमा के पीछे अलग डिजाइन, कला और कहानी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि अब इसे केवल निजी संग्रह तक सीमित न रखकर संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। संग्रहालय बनने के बाद प्रतिमाओं को उनकी सामग्री, आकार, कला शैली और विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के साथ कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों को भी गणेश प्रतिमाओं के विभिन्न स्वरूपों को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
भगवान गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में एक ही स्थान पर गणपति के 1000 से अधिक स्वरूपों का संग्रह धार्मिक आस्था के साथ कला और संस्कृति के संरक्षण का भी उदाहरण बन रहा है। संग्रहालय का स्वरूप मिलने के बाद यह अनूठा संग्रह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रह सकेगा।
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