धर्म-अध्यात्म

कर्मा धर्मा एकादशी 22 सितंबर को जानें पर्व का महत्व

nidhi
19 Sept 2026 8:30 AM IST
कर्मा धर्मा एकादशी 22 सितंबर को जानें पर्व का महत्व
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कर्मा धर्मा एकादशी
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मनाई जाने वाली कर्मा-धर्मा एकादशी इस वर्ष 22 सितंबर को श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाएगी। इस पर्व का धार्मिक और लोक परंपराओं में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के साथ बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सलामती की कामना करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी या पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में अपनी करवट बदलते हैं। इसी कारण इस एकादशी को विशेष पुण्यदायी माना गया है। श्रद्धालु इस अवसर पर उपवास रखते हैं और श्रीहरि की विधि-विधान से पूजा करते हैं।
कर्मा-धर्मा पर्व की परंपरा विशेष रूप से भाई-बहन के स्नेह और पारिवारिक खुशहाली से जुड़ी मानी जाती है। बहनें अपने भाइयों की सलामती और लंबी आयु की कामना करते हुए पूजा करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं और युवतियां व्रत रखती हैं तथा पारंपरिक कथा सुनने के बाद पूजा संपन्न करती हैं। घरों में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं।
इस दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी के दिन तुलसी पूजन को भी विशेष महत्व दिया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार अन्न का त्याग करते हैं और फलाहार ग्रहण करते हैं।
कर्मा-धर्मा से जुड़ी लोक परंपराएं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से देखने को मिलती हैं। कई जगह महिलाएं समूह में एकत्र होकर पारंपरिक गीत गाती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित इस पर्व में बहनें अपने भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा की कामना करती हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। हालांकि कर्मा-धर्मा से जुड़ी पूजा-विधि और लोककथाएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसकी पूजा की जाती है।
22 सितंबर को मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी रहेगी। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन करेंगे और व्रत का संकल्प लेंगे। अगले दिन द्वादशी पर परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाएगा। धार्मिक आस्था के साथ-साथ कर्मा-धर्मा एकादशी भाई-बहन के प्रेम और परिवार की खुशहाली की कामना का पर्व भी मानी जाती है।
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