धर्म-अध्यात्म

काशी में शिवभक्ति का दिखा अद्भुत नजारा दूसरे सोमवार एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

nidhi
10 Aug 2026 8:40 AM IST
काशी में शिवभक्ति का दिखा अद्भुत नजारा दूसरे सोमवार एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
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सावन के दूसरे सोमवार काशी में गूंजा बोल बम एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन
वाराणसी: सावन के दूसरे सोमवार पर काशी नगरी 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठी। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भक्तों की लंबी कतारें नजर आईं। बताया गया कि एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए।
भोर से ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सावन के दूसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही कतार में लगने लगे थे। जैसे-जैसे सुबह हुई, भक्तों की संख्या बढ़ती चली गई। हाथों में गंगाजल, बेलपत्र और पूजा सामग्री लिए श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ते नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजते रहे। पूरे काशी क्षेत्र में सावन की भक्ति और आस्था का माहौल दिखाई दिया।
एक लाख से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन
सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आस्था के चलते काशी विश्वनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन और पूजा को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गईं।
एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहा। अलग-अलग स्थानों पर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई।
गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़िये
सावन के दौरान काशी में बड़ी संख्या में कांवड़िये भी पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे। भगवान शिव के जयकारों के बीच कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन-पूजन किया। गंगा घाटों से लेकर बाबा विश्वनाथ मंदिर तक भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
बाबा का हुआ विशेष पूजन
सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा विश्वनाथ के विशेष पूजन और श्रृंगार की परंपरा के तहत धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं ने बाबा को बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। सावन में भगवान शिव की आराधना को विशेष फलदायी माना जाता है। यही वजह है कि सोमवार के दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है।
सुरक्षा के किए गए पुख्ता इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और निर्धारित कतार व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई। भीड़ के कारण किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई।
यातायात व्यवस्था पर भी रहा फोकस
सावन के सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण वाराणसी के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था पर भी दबाव रहा। मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पैदल मंदिर की ओर जाने के कारण कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रखी गई। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन और निर्धारित मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की।
काशी में दिखा सावन का रंग
सावन के दूसरे सोमवार पर काशी की गलियों, घाटों और मंदिर क्षेत्र में धार्मिक उत्साह चरम पर नजर आया। जगह-जगह भगवान शिव के भजनों और जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष आस्था और भक्ति का रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। सावन के सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर जलाभिषेक व पूजा-अर्चना करते हैं। काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है, इसलिए सावन के दौरान यहां बाबा विश्वनाथ के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी कारण सावन के सोमवार पर वाराणसी में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भक्तों में दिखा जबरदस्त उत्साह
लंबी कतार और भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह कम नहीं हुआ। भक्त लगातार 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारे लगाते हुए बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ते रहे। कई श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। घाटों पर भी सुबह से ही भक्तों की भीड़ दिखाई दी।
काशी विश्वनाथ धाम में भव्य माहौल
काशी विश्वनाथ धाम में सावन के दूसरे सोमवार पर विशेष रौनक रही। मंदिर परिसर को सजाया गया और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए कतार प्रबंधन, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया।
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