
जया लक्ष्मी तिवारी, लेखक एवं स्तंभकार
खेलों से बदल रही छत्तीसगढ़ की इमेज
छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। विकसित राज्य बनने की ओर कदम बढ़ा रहे छत्तीसगढ़ के लिए खेल एक ऐसी सॉफ्ट पावर बन रहा है, जो प्रतिभाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के साथ राज्य की छवि को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान कर रहा है। दरअसल, एक सीमित क्षेत्र में सीमित होने के बाद भी नक्सलवाद की वजह से पूरे राज्य की छवि धूमिल हो रही थी, लेकिन एक ओर जहां नक्सलवाद समाप्ती की ओर है वहीं खेलों के जरिए जनजातीय बाहुल्य यह राज्य वैश्विक मानचित्र अपनी नई छवि गढ़ रहा है।
पिछले कुछ महीने से प्रदेश में कई खेलों से जुड़े कई बड़े आयोजन राज्य की उस ताकत को वैश्विक मंच प्रदान कर रहे हैं, जिसमें असीमित अवसर हैं। छत्तीसगढ़ की मेजबानी में पहली बार खेलों इंडिया ट्रायबल गेम्स की मेजबानी प्रदेश करने जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जनसंख्या का लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय समाज से आता है। जनजातीय समाज के युवा निशानेबाजी, फुटबॉल, भारोत्तोलन, पावर लिफ्टिंग, खो-खो, हॉकी,फुटबॉल जैसी प्रतियोगिताओं आए दिन सफलता के कीर्तिमान गढ़ते रहे हैं। उनका इन खेलों में काफी रुझान रहता है। कुछ महीने पहले केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी की उपस्थिति में बस्तर ओलंपिक का समापन हुआ। जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को निखारने का यह अभिनव प्रयास है। 2024 में बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख और 2025 में 2.92 लाख पंजीयन इसकी भव्यता की पुष्टि करते हैं। इसमें यदि अन्य जनजातीय बाहुल्य राज्यों की प्रतिभाओं को भी अवसर प्रदान किया जाए तो बस्तर ओलंपिक को एक राष्ट्रीय पहचान दी जा सकती है। पिछले साल छत्तीसगढ़ प्रदेश आरचरी एसोसिएशन द्वारा आयोजित 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता ने भी खेलों के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को स्थापित किया है। तीरंदाजी ओलंपिक में शामिल है। प्रदेश के तीरंदाज इंडियन वर्ग में पिछले कई साल से मेडल जीत रहे हैं।
खेलों के प्रति छत्तीसगढ़ के उत्साह का अंदाजा शहीद वीरनारायण सिंह क्रिकेट स्टेडिय में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एकदिवसीय मैच और फिर उसके कुछ दिनों के बाद ही न्यूजीलैंड के विरुद्ध टी-20 मैच में देखने को मिला। दोनों ही मैच में स्टेडियम पूरी तरह भरा नजर आया। खेलों का आयोजन अपने साथ रोजगार रोजगार के अनेक अवसर लेकर आता है, इसे क्रिकेट स्टेडियम परिसर तथा उसके बाहर लगी दुकानों में सभी ने देखा। इस अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम को और अधिक सुविधासंपन्न बनाए जाने की भी आवश्यकता है। खेल घरेलू पर्यटकों के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। इससे सेवा उद्योग को बढ़ावा मिलता है। रायपुर को एक के बाद एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय मैच की मेजबानी मिलने से छत्तीसगढ़ वैश्विक मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। खेलों के बड़े आयोजन उस राज्य और शहर के प्रति निवेशकों में भी भरोसा पैदा करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बड़ी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए खेल संगठनों के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी प्रभावी उपयोग करते हैं।
साय सरकार खेलों के क्षेत्र में भी काफी महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए हैं। इनमें शहीद वीरनारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के संचालन की जिम्मेदारी शर्तों के साथ छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ को सौंपना भी महत्वपूर्ण है। इससे बीसीसीआई के साथ समन्वय बेहतर हुआ है।
प्रदेश सरकार नवा रायपुर में राष्ट्रीय आर्चरी एकेडमी बना रही है। इसके लिए लगभग 14 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। नवा रायपुर में ही 85 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनाया जा रहा है, जो खेल प्रतिभाओं को निखारने का काम करेगा। प्रदेश सरकार ओलंपिक में शामिल होने वाले एथलीट को 21 लाख रुपये देगी। यदि हमारे प्रदेश का कोई युवा खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतता है तो उसे 3 करोड़, रजत पदक जीतने पर 2 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने वालों को एक करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रदेश में खेलों इंडिया के नये परिसरों की शुरुआत की गई है, इससे खेल प्रतिभाओं को जरुरी सुविधाएं मिल रही हैं। राज्य सरकार एडवेंचर्स स्पोर्ट्स को भी काफी प्रोत्साहित कर रही है। रायपुर में पिछले साल हुई नेशनल सुपरक्रॉस बाइक रेसिंग चैंपियनशिप इसका बेहतरीन उदाहरण है,जिसमें देश-विदेश के सौ से अधिक प्रोफेशनल बाइकर्स ने स्टंट और रफ्तार का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से उनके गृह जिले जशपुर में 1.98 करोड़ की लागत से एड़वेंचर स्पोर्ट्स सेंटर का शुभारंभ किया जा चुका है।
खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। इसका एक अहम उद्देश्य राज्य के पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करना भी है। इसके तहत आधारभूत खेल संरचनाओं की मरम्मत, विकास, खेल उपकरण प्रदान करने के साथ पंजीकृत खेल समिति और क्लब को प्रोत्साहन प्रतिभाखोज के तहत खेलवृत्ति, पारंपरिक खेल महोत्सव आदि का आयोजन किया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश ने ओलंपिक में मेजबानी का प्रस्ताव रखा है। यदि खेलों से जुड़ी योजनाओं का समुचित और पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन होता है तो छत्तीसगढ़ के युवा एथलीट ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियन गेम्स जैसी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाओं में भारत का नाम रोशन करते नजर आएंगे।





