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सतलुज-यमुना लिंक समझौते के नाम पर केंद्र को मिली चेतावनी... कैप्टन अमरिंदर ने कही ये बड़ी बात...

Janta se Rishta
18 Aug 2020 3:46 PM GMT
सतलुज-यमुना लिंक समझौते के नाम पर केंद्र को मिली चेतावनी... कैप्टन अमरिंदर ने कही ये बड़ी बात...
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। चंडीगढ़। सतलुज-यमुना लिंक समझौते के नाम पर एक समय अमृतसर की लोकसभा सीट से इस्तीफा देने वाले पंजाब के वर्तमान सीएम अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। पंजाब सरकार की ओर से बैठक में शामिल हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अगर सतलुज यमुना लिंक कनाल का काम पूरा होता है तो पंजाब जल उठेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। सीएम अमरिंदर ने कहा कि पंजाब के इन हालातों का असर राजस्थान और हरियाणा पर भी पड़ेगा। मंगलवार को पंजाब और हरियाणा की सरकारों के बीच हुई बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल हुए। इस बैठक में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को आपको राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में देखना चाहिए।

ये राष्ट्रीय समस्या बन जाएगी: कैप्टन अमरिंदर- अगर आप सतलुज-यमुना नहर के मुद्दे पर आगे बढ़ते हैं तो पंजाब जल उठेगा और ये एक राष्ट्रीय समस्या बन जाएगी। कैप्टन ने कहा कि पंजाब में उपजे हालातों का असर हरियाणा और राजस्थान पर भी पड़ेगा। हालांकि इन तमाम बातों के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि बैठक सकारात्मक रही।

सतलुज-यमुना लिंक कैनाल निर्माण मामले में पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

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पंजाब सरकार अपने रुख पर कायम : बताया जा रहा है कि इस नहर के मुद्दे पर पंजाब सरकार अपने रुख पर पूरे तरह से कायम है। वहीं हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बैठक के बाद कहा कि पहली बार इस मुद्दे पर खुले मन से बात हुई है। बैठक में कैप्टन अमरिंदर सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

44 साल पुराना है विवाद : सतलुज-यमुना लिंक कनाल का मुद्दा 44 साल पुराना है। साल 1976 के मार्च महीने में केंद्र सरकार ने पंजाब के 7.2 मिलियन एकड़ फीट जल में से 3.5 मिलियन एकड़ फीट पानी हरियाणा को देने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 8 अप्रैल 1982 को पटियाला में सतलुज यमुना लिंक कनाल का उद्घाटन किया था। इसके बाद राजीव गांधी सरकार में नहर निर्माण के फैसले को सहमति दी थी। हालांकि ये फैसला समझौते के अनुसार लागू नहीं हुआ, जिसके कारण 1996 में हरियाणा की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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