भारत

अपराध से नाता तोड़ने युवाओं ने तोड़े मोबाइल, बदमाशों के संपर्क में थे, एक कॉल में देते थे वारदात को अंजाम

Nil dhankar
19 Jun 2026 7:02 AM IST
अपराध से नाता तोड़ने युवाओं ने तोड़े मोबाइल, बदमाशों के संपर्क में थे, एक कॉल में देते थे वारदात को अंजाम
x
पढ़े पूरी खबर

हरियाणा। कभी इन्हीं मोबाइल फोन पर कॉल आते थे. कभी इन्हीं स्क्रीन पर नए 'काम' की खबर मिलती थी. कभी इन्हीं नंबरों से लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश होती थी. लेकिन इस बार कहानी अलग थी. गांव के चौपाल पर दर्जनों युवक जमा हुए. सामने मोबाइल फोन रखे गए. फिर एक-एक करके 55 मोबाइल जमीन पर पटके गए. स्क्रीन टूटी, कवर बिखरे और शायद उनके साथ अपराध की एक पुरानी जिंदगी भी टूट गई.

हरियाणा के नूंह जिले के एक गांव में यह नजारा सिर्फ मोबाइल तोड़ने का नहीं था, बल्कि नई शुरुआत का ऐलान था. नूंह जिले के नगीना थाना क्षेत्र के सूखपुरी गांव में हाल ही में एक अनोखी पहल देखने को मिली. गांव के कुछ युवकों ने सार्वजनिक रूप से 55 मोबाइल फोन तोड़ दिए और ऐलान किया कि अब वे अपराध की दुनिया से कोई रिश्ता नहीं रखेंगे. यह फैसला अचानक नहीं आया था. इसके पीछे पुलिस और ग्रामीणों की लंबे समय से चल रही कोशिशें थीं. दरअसल, नूंह पुलिस अपराध छोड़ने और कानून का पालन करने को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चला रही है. पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान का असर सूखपुरी गांव में दिखाई दिया.

गांव के बुजुर्ग, पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और युवा एक जगह इकट्ठा हुए. बातचीत हुई. भविष्य की चर्चा हुई. इसके बाद युवाओं ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे अब अपराध से जुड़े किसी भी काम का हिस्सा नहीं बनेंगे. इसी दौरान उन्होंने अपने पास मौजूद 55 मोबाइल फोन तोड़ दिए. ग्रामीणों का कहना है कि ये मोबाइल उनके पुराने नेटवर्क और गलत गतिविधियों से जुड़े संपर्कों का माध्यम थे. युवाओं का मानना था कि अगर नई जिंदगी शुरू करनी है तो सबसे पहले पुराने रास्तों से नाता तोड़ना होगा. कार्यक्रम में मौजूद डीएसपी अभिषेक खटकड़ और नगीना थाना प्रभारी सचिन कुमार ने युवाओं के इस कदम की सराहना की. अधिकारियों ने कहा कि पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं है. अगर कोई व्यक्ति अपनी गलती सुधारना चाहता है और मुख्यधारा में लौटना चाहता है, तो उसे अवसर मिलना चाहिए. पुलिस का कहना है कि जो लोग ईमानदारी से जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा.

इस पूरी पहल में सिर्फ पुलिस नहीं, बल्कि पूरा गांव शामिल रहा. गांव के सरपंच और स्थानीय लोगों ने युवाओं को समझाया कि अपराध का रास्ता कुछ समय के लिए आसान लग सकता है, लेकिन उसका अंत अक्सर जेल, बदनामी या बर्बादी में होता है. ग्रामीणों ने युवाओं को शिक्षा, रोजगार, खेती, कारोबार और सामाजिक कार्यों की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित किया. गांव के लोगों का कहना है कि अगर समाज किसी को दूसरा मौका नहीं देगा, तो सुधार की बात सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जाएगी. सूखपुरी गांव की यह तस्वीर इसलिए अलग है, क्योंकि यहां किसी अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हुई, कोई पुलिस मुठभेड़ नहीं हुई, कोई छापा नहीं पड़ा. यहां कुछ युवाओं ने खुद फैसला लिया कि अब जिंदगी का रास्ता बदलना है. 55 मोबाइल फोन टूटने की आवाज शायद कुछ सेकंड में खत्म हो गई होगी, लेकिन उसका संदेश काफी दूर तक गया है. आज के दौर में मोबाइल सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि संपर्क का सबसे बड़ा माध्यम है. ऐसे में सार्वजनिक रूप से मोबाइल तोड़ना एक प्रतीकात्मक संदेश था कि वे अपने पुराने नेटवर्क, पुराने संपर्कों और पुरानी आदतों से दूरी बनाना चाहते हैं. यही वजह है कि इस पहल को सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


Next Story