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ऊना। अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने गुरुवार को जिला स्तर पर जातीय भेदभाव और दिव्यांग संरक्षण पर गठित दो महत्वपूर्ण समितियों की बैठकें लीं। उन्होंने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई और परस्पर समन्वय के निर्देश दिए। पहली बैठक अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत गठित जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की थी। बैठक के उपरांत अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि इस अधिनियम का उद्देश्य जातिगत भेदभाव को रोकना और पीडि़तों को न्याय व राहत उपलब्ध कराना है। उन्होंने जानकारी दी कि जिले में 31 अगस्त 2025 तक 67 मामले दर्ज हैं। इनमें से 52 मामले न्यायालय में हैं।
इसके अलावा चार मामलों में न्यायालय का फैसला आ चुका है और 4 मामलों में अन्वेषण के बाद एससी एसटी एक्ट की धारा खारिज की गई है, जबकि 7 मामलों में पुलिस अन्वेषण जारी है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के अंतर्गत सजा दिलाने के साथ-साथ पीडि़त लोगों को कानूनी संरक्षण और पुनर्वास राहत राशि विभिन्न धाराओं के तहत एक लाख रुपए से 8 लाख 25 हजार रुपए तक की धनराशि देने का प्रावधान है। इस राशि की प्रथम किस्त एफआईआर दर्ज होने पर, दूसरी किस्त मामला न्यायालय में प्रस्तुत होने पर और शेष राशि का भुगतान फैसला आने पर किया जाता है। अतिरिक्त उपायुक्त ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे मामलों की प्रगति पर सतत निगरानी रखें ताकि पीडि़तों को समय पर राहत मिले।
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