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PM मोदी का करीबी होगा अगला उपराष्ट्रपति?

Nilmani Pal
8 Aug 2025 6:55 AM IST
PM मोदी का करीबी होगा अगला उपराष्ट्रपति?
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दिल्ली। भारत के अगले उपराष्ट्रपति पद को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने आधिकारिक रूप से तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को संसद भवन परिसर में आयोजित एक अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को एनडीए की ओर से उम्मीदवार चयन का अधिकार सौंपा गया। बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें गृहमंत्री अमित शाह, जदयू नेता ललन सिंह, शिवसेना (शिंदे गुट) के श्रिकांत शिंदे, टीडीपी के लवू श्री कृष्ण देवरा‍यालु और लोजपा (रामविलास) के चिराग पासवान शामिल थे।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से यह पद रिक्त है और राजनीतिक हलकों में अगले उपराष्ट्रपति को लेकर कयासों का दौर जारी है। कई नामों की चर्चा हो रही है, हालांकि भाजपा ने पिछली बार भी धनखड़ के नाम की घोषणा कर लोगों को चौंका दिया था। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल राज्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने हाल ही में अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा किया है। उन्हें अनुच्छेद 370 हटाने के बाद क्षेत्र में स्थिरता लाने का श्रेय दिया जाता है। हालांकि उनके कार्यकाल का अंत 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की छाया में हुआ, जिसमें 26 लोगों की जान गई। इसके बावजूद उनकी दावेदारी मजबूत मानी जाती है। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी नेता माना जाता है।
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना का नाम भी चर्चाओं में है। कॉर्पोरेट क्षेत्र से आने वाले सक्सेना ने दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ कई प्रशासनिक फैसले रोके, जिससे उनकी केंद्र सरकार के प्रति निष्ठा और सक्रियता सामने आई। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उन्हें अब बड़ी भूमिका सौंपी जा सकती है।बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार को लेकर भी चर्चा तेज है कि वे उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह अटकलें अभी अपुष्ट हैं। उनकी सेहत को लेकर भी हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। एनडीए के कुछ सहयोगी दलों का मानना है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हटकर राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका निभा सकते हैं। जदयू के पूर्व नेता उपेन्द्र कुशवाहा और अन्य नेताओं ने इस ओर इशारा किया है कि नीतीश अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपना चाहते हैं।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह जदयू से आते हैं। उन्हें भी एक विश्वसनीय और अनुभवी चेहरा माना जाता है। 2020 से इस पद पर रहते हुए उन्होंने सदन में कई बार संतुलन बनाए रखा है और सरकार के साथ उनकी साफ समझ रही है। उन्होंने इस बीच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का भरोसा जीता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए इस बार राजनीतिक संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और अनुभव को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार चुनेगा। सबकी निगाहें इस पर हैं कि प्रधानमंत्री मोदी किस नाम पर मुहर लगाते हैं। वहीं विपक्ष भी जल्द ही अपने उम्मीदवार को लेकर मंथन शुरू कर सकता है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। हालांकि, एनडीए के पास लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर स्पष्ट बहुमत है।
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