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व्हाट्सएप मैसेज ने मिलाया 16 साल से बिछड़ा परिवार, जानिए पूरी कहानी...
Shantanu Roy
23 Jun 2026 2:54 PM IST

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पिता-पुत्र के मिलन ने लाखों लोगों को किया भावुक
Jharkhand. झारखंड। कहते हैं कि अगर किसी अपने को पाने की चाह दिल से की जाए तो किस्मत भी रास्ता बना देती है। झारखंड के चतरा जिले से सामने आई एक ऐसी ही भावुक कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। एक व्हाट्सएप मैसेज ने 16 साल पहले बिछड़े पिता को उसके परिवार से मिलवा दिया। वर्षों बाद हुए पिता-पुत्र के इस मिलन को देखकर न केवल परिवार की आंखें नम हो गईं, बल्कि सोशल मीडिया पर इस कहानी को पढ़ने वाले लाखों लोग भी भावुक हो उठे।
यह कहानी चतरा जिले के रहने वाले रमेश बाबू की है, जो करीब 16 वर्ष पहले एक मामूली पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर चले गए थे। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह नाराजगी इतने लंबे बिछोह में बदल जाएगी। परिवार ने शुरुआती दिनों में उनकी काफी तलाश की, रिश्तेदारों से संपर्क किया, कई जगह खोजबीन की, लेकिन रमेश बाबू का कोई पता नहीं चल सका। धीरे-धीरे समय बीतता गया और परिवार उम्मीद तथा निराशा के बीच जिंदगी जीता रहा।
घर छोड़ने के बाद रमेश बाबू का जीवन भी आसान नहीं रहा। बताया जाता है कि वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे और नशे की लत का भी शिकार हो गए। लगातार भटकते हुए उन्होंने कई शहरों में समय बिताया। परिस्थितियां इतनी खराब हो गईं कि वे बेघर होकर सड़कों पर जीवन गुजारने लगे। इसी दौरान वे दक्षिण भारत के शहर चेन्नई पहुंच गए, जहां उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। चेन्नई में सामाजिक सेवा करने वाली एक संस्था ने उन्हें सड़क पर असहाय अवस्था में देखा। संस्था के कार्यकर्ताओं ने उनकी मदद की और उन्हें एक पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया। यहां उनका इलाज शुरू हुआ और धीरे-धीरे उनकी मानसिक स्थिति में सुधार आने लगा। कई वर्षों तक पुनर्वास केंद्र में रहने के दौरान उनका उपचार चलता रहा।
इलाज के बाद जब उनकी स्मरण शक्ति कुछ बेहतर हुई तो उन्होंने अपने बारे में सीमित जानकारी देना शुरू किया। उन्हें इतना याद था कि वे झारखंड के रहने वाले हैं। संस्था के कार्यकर्ताओं ने उनकी पहचान और परिवार का पता लगाने का प्रयास शुरू किया। इसके लिए उन्होंने रमेश बाबू की तस्वीर और उपलब्ध जानकारी को व्हाट्सएप समूहों तथा सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से साझा किया।
यहीं से इस कहानी में वह मोड़ आया जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। व्हाट्सएप पर साझा किया गया संदेश कई लोगों तक पहुंचा और घूमते-घूमते झारखंड के एक किराना दुकानदार तक जा पहुंचा। दुकानदार ने तस्वीर देखते ही रमेश बाबू को पहचान लिया। उसने तुरंत उनके परिवार से संपर्क किया और बताया कि जिनकी वे वर्षों से तलाश कर रहे हैं, वे जीवित हैं और चेन्नई में हैं।यह खबर सुनते ही परिवार में खुशी और अविश्वास दोनों का माहौल बन गया। परिवार के लोग तुरंत संपर्क में आए और पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद जो संयोग सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया।
जब रमेश बाबू घर छोड़कर गए थे, तब उनका बेटा महज पांच वर्ष का था। 16 साल बाद वही बेटा बड़ा होकर नौकरी और कामकाज के सिलसिले में चेन्नई में ही रहने लगा था। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस पुनर्वास केंद्र में रमेश बाबू रह रहे थे, वह उनके बेटे के निवास स्थान से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। दोनों एक ही शहर में रह रहे थे, लेकिन वर्षों तक एक-दूसरे से अनजान थे।व्हाट्सएप संदेश मिलने के बाद पिता और बेटे की मुलाकात की व्यवस्था की गई। जैसे ही दोनों आमने-सामने आए, भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पिता और पुत्र एक-दूसरे से लिपटकर रो पड़े। वर्षों का दर्द, इंतजार और बिछोह कुछ ही पलों में आंखों के रास्ते बाहर आ गया। वहां मौजूद लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।
मुलाकात के बाद परिवार ने रमेश बाबू को वापस अपने गांव लाने की तैयारी शुरू की। 21 जून को वे अपने गृह जिले लौटे, जहां परिजनों और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। 16 साल पहले बिखरा परिवार आखिरकार फिर से एक हो गया।इस भावुक कहानी ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का दिल जीत लिया है। हजारों लोगों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई यूजर्स ने इसे उम्मीद, परिवार और रिश्तों की ताकत का प्रतीक बताया। लोगों ने कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल किस तरह किसी की जिंदगी बदल सकता है, यह कहानी उसका सबसे सुंदर उदाहरण है।
कुछ लोगों ने इस घटना को चमत्कार जैसा बताया, तो कई लोगों ने इसे परिवार की अटूट उम्मीद और प्रेम की जीत कहा। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि पिता परिवार की सबसे बड़ी ताकत होते हैं और उनका वापस लौटना पूरे घर में नई जिंदगी लेकर आया। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि 16 साल बाद पिता को देखकर बेटे के मन में कितनी भावनाएं रही होंगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।यह कहानी सिर्फ एक परिवार के पुनर्मिलन की नहीं है, बल्कि यह उम्मीद, धैर्य, मानवीय संवेदनाओं और तकनीक की सकारात्मक भूमिका का भी उदाहरण है। एक साधारण व्हाट्सएप संदेश ने वह कर दिखाया जो वर्षों की तलाश नहीं कर पाई थी। यही वजह है कि यह कहानी लाखों लोगों के दिलों को छू रही है और लोगों को अपने परिवार तथा रिश्तों की अहमियत का एहसास करा रही है।
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