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कांगड़ा के जंगल और घाटों पर कचरे का डेरा

Shantanu Roy
22 May 2026 9:03 PM IST
कांगड़ा के जंगल और घाटों पर कचरे का डेरा
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Hospice. धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण जिला कांगड़ा न केवल अपनी प्राकृतिक सौंदर्य क लिए जाना जाता है बल्कि अपने मंदिरों और घाटों पर भी लाखों पर्यटक आकर्षित करता है। पर आश्चर्य की बात है कि कचरे के प्रबंधन के लिए न ही प्रशासन, न ही निगम और न ही पंचायतें संजीदा है। सिद्धबाड़ी के चिन्मय तपोवन आश्रम के आगे जंगल पर न केवल सैलानी बल्कि धर्मशाला, योल, दाड़ी आदि से कई लोग आते हैं सैर सपाटे के लिए और शाम वहां बिताने के बाद जंगल में सारा कचरा फेंक कर निकल जाते हैं। आश्चर्य की बात है कि टूरिस्ट सीजन में काफी पैसा कमाने वाले होटल और होमस्टे चलाने वाले व्यापारी भी रात को छुपकर अपना कचरा जंगल में फेंक कर जाते हैं। जबकि निगम और निजी संस्थाओं ने कचरे को उठाने की बराबर व्यवस्था की है। कांगड़ा बाईपास पर बाणगंगा घाट पर भी यही नज़ारा देखने को मिलता है। यात्री आते हैं और तीर्थाटन के बाद बड़ी मात्रा में कचरा छोड़ कर
जाते हैं।

आश्चर्य की बात है कि वन विभाग, प्रशासन और निगम इस और ध्यान नहीं दे पा रहा है। बाईपास पर बनाई गई नालियां अतिरिक्त जल को और सीवरेज को शहर से बाहर ले जाने का काम करती है जब उन्हें ही प्लास्टिक से भर दिया जाएगा तो निकासी कैसे होगी। यह गंदगी फैलाएगा और कई बीमारियों को जन्म देगा। विधानसभा के आगे कनेड़ पंचायत में पडऩे वाले जंगलों के संरक्षण के लिए वन विभाग को सख्त कदम उठाने होंगे। कालेज के छात्र-छात्राएं और लडक़े लड़कियां यदि जंगल में आकर बैठते हैं तो उन पर चालान होना चाहिए, यह तभी संभव है जब सीसीटीवी कैमरा लगे हो। ग्राम सेक्रेटरी का भी यही कहना है कि हम चालान कर सकते हैं पर लोग रात को छुपकर कचरा फेंकने के लिए आते हैं। काफी लोकल लोग भी रात को जंगल में आकर बैठते हैं जिस पर बैन लगना चाहिए।
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