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किशाऊ बांध परियोजना पर बवाल, जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों ने कहा

Shantanu Roy
19 Jun 2026 2:52 PM IST
किशाऊ बांध परियोजना पर बवाल, जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों ने कहा
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Sirmaur. सिरमौर। टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहु-उद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से सटे जौनसार-बावर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। परियोजना से लगभग 25 से 30 गांवों के जलमग्न होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे हजारों परिवारों के विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा ग्रामीणों का कहना है कि बांध निर्माण से सदियों पुरानी बसाहटें, कृषि भूमि, मंदिर और देवस्थल जलमग्न हो जाएंगे। उनका मानना है कि पहाड़ी क्षेत्र की जीवनशैली, संस्कृति और कृषि-वानिकी आधारित अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन केवल भूमि के बाजार मूल्य से नहीं
किया जा सकता।


ग्रामीणों ने पुनर्वास एवं मुआवजा नीति को भी अपर्याप्त बताया है। पर्यावरणविदों ने भी हिमालयी क्षेत्र में प्रस्तावित इस बड़े बांध को लेकर चिंता व्यक्त की है। वहीं सरकार का पक्ष है कि किशाऊ बांध परियोजना से दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित छह राज्यों को पेयजल उपलब्ध होगा, 660 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा तथा यमुना नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित किया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि परियोजना में भूकंपरोधी आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पुनर्वास नीति अपनाई जाएगी। इस विषय पर जौनसार-बावर महासभा के अध्यक्ष मुन्ना सिंह राणा ने कहा कि बड़े विकास कार्यों और परियोजनाओं का विरोध होना स्वाभाविक है। क्वानू क्षेत्र का अपना विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक और कृषि इतिहास है, जिसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा।
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