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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फुलझड़ी जलाकर दी दीपावली की शुभकामनाएं
Shantanu Roy
20 Oct 2025 9:54 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक फुलझड़ी जलाकर त्योहार की शुरुआत का प्रतीकात्मक संदेश दिया। नितिन गडकरी ने कहा कि दीपावली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और दुख पर सुख की विजय का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इस दीपावली पर सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से उत्सव मनाएं। मंत्री ने अपने ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि दीपावली परिवार, मित्र और समाज में भाईचारे और प्रेम को बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, ध्वनि और प्रदूषण रहित पटाखों का प्रयोग करें।
गडकरी ने बताया कि फुलझड़ी जलाना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि खुशियों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस दीपावली पर हर भारतीय अपने घरों और दिलों में प्रकाश और खुशहाली फैलाए। देशभर में दीपावली के अवसर पर लोग घरों और मंदिरों में दीपक जलाते हैं, मिठाई और उपहार बांटते हैं और परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर त्योहार का आनंद लेते हैं। गडकरी ने इस संदेश के माध्यम से जनता को सुरक्षित, आनंदमय और उत्सवपूर्ण दीपावली मनाने के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दीपावली का पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हर व्यक्ति इस दीपावली पर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव और खुशियाँ लाएगा।
दीपावली, जिसे लोग दिवाली के नाम से भी जानते हैं, हिन्दू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की जीत और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूरे भारत में दीपावली को बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। दीपावली का त्योहार मुख्यतः पांच दिनों तक चलता है। इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली का मुख्य दिन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। प्रत्येक दिन का धार्मिक महत्व अलग होता है और इस अवसर पर लोग विशेष अनुष्ठान और पूजा करते हैं।
दीपावली की सबसे प्रमुख परंपरा दीयों और रोशनी की है। घरों और मंदिरों में दीपक जलाकर अंधकार को दूर करना और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करना इसका मुख्य उद्देश्य होता है। लोग अपने घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं और मिठाइयाँ तैयार करते हैं। खासकर बच्चों और परिवार के छोटे सदस्य इस त्योहार में बड़े उत्साह से शामिल होते हैं। धनतेरस दीपावली का पहला दिन होता है। इस दिन लोग सोना, चांदी और धातु के बर्तन खरीदकर समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। उसके बाद नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली आती है, जिसे कई जगहों पर काली चौदस भी कहा जाता है। इस दिन बुराई के प्रतीक नरकासुर का वध करने के लिए पूजा की जाती है।
दीपावली का मुख्य दिन लक्ष्मी पूजा और गणेश पूजा के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन लोग अपने घर की सफाई करते हैं और लक्ष्मी माता की पूजा करके धन, वैभव और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। व्यापारियों और कारोबारी वर्ग के लिए यह दिन नए साल की तरह माना जाता है। बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, नए नोटों के आदान-प्रदान और दुकानों में भीड़ देखने को मिलती है। दीपावली के दिन पटाखों और आतिशबाजी की परंपरा भी है। हालांकि लोग सुरक्षा और पर्यावरण के कारण कम ध्वनि वाले और पर्यावरण-मित्र पटाखों का प्रयोग कर रहे हैं। यह त्योहार परिवार और मित्रों के साथ मिलकर खुशियाँ बांटने का अवसर भी देता है। लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं, मिठाई और प्रसाद बांटते हैं, और पुराने गिले-शिकवे भूलकर मेल-जोल बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, भाई दूज और गोवर्धन पूजा भी दीपावली के उत्सव का हिस्सा हैं। भाई दूज पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, वहीं गोवर्धन पूजा पर गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। दीपावली का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व सौहार्द, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। पूरे देश में लोग जाति, धर्म या भाषा की परवाह किए बिना इस पर्व को हर्षोल्लास और प्रेम के साथ मनाते हैं। इस अवसर पर सरकार और स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा, साफ-सफाई और रोशनी की विशेष व्यवस्था करते हैं। बाजार, मंदिर और सार्वजनिक स्थल दीपावली के लिए विशेष रूप से सजाए जाते हैं। इस प्रकार दीपावली न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र है। समग्र रूप में दीपावली का पर्व हमें अंधकार पर प्रकाश, दुख पर सुख और अज्ञान पर ज्ञान की सीख देता है। यह त्योहार खुशियों, भाईचारे और सकारात्मकता का प्रतीक है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई इस दिन का बेसब्री से इंतजार करता है। दीपावली के रंग-बिरंगे दीप, मिठाइयाँ और आतिशबाजी इस पर्व को यादगार बनाते हैं। इस प्रकार, दीपावली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह हर भारतीय के जीवन में आनंद, समृद्धि और आशा की नई किरण लेकर आता है।
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