
असम. विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है. इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दो दिवसीय असम दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. अमित शाह आज डिब्रूगढ़ पहुंचेंगे और वहां कुछ आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद गुवाहाटी में पार्टी और गठबंधन नेताओं के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन करेंगे. माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम रूपरेखा तय हो सकती है.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अमित शाह की बैठकों का फोकस आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए को एकजुट और मजबूत तरीके से मैदान में उतारने पर रहेगा. बीजेपी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह असम का चुनाव सहयोगी दलों के साथ लड़ेगी और मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर हिमंता बिस्वा सरमा ही आगे रहेंगे. चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्य सरकार के कामकाज को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा. पार्टी की रणनीति लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की है, जिसे बीजेपी 'असम में हैट्रिक' के तौर पर देख रही है.
बीजेपी नेताओं का मानना है कि हालिया परिसीमन और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद राज्य का राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बदला है. पार्टी का आकलन है कि इन बदलावों का लाभ एनडीए को मिल सकता है. नए परिसीमन के चलते कुछ क्षेत्रों में सीटों की संरचना बदली है, वहीं मतदाता सूची में संशोधन से कई इलाकों में नए मतदाताओं का जुड़ाव हुआ है. बीजेपी इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर माइक्रो-लेवल रणनीति तैयार कर रही है.
असम विधानसभा की कुल 126 सीटों में एनडीए का लक्ष्य इस बार सौ से अधिक सीटें जीतने का रखा गया है. बीजेपी का गठबंधन असम गण परिषद (एजीपी), यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) और बोडो पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ है. हालांकि यूपीपीएल और बीपीएफ के बीच मतभेद एनडीए के लिए चुनौती बने हुए हैं. बीजेपी नेतृत्व इन मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है ताकि गठबंधन एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर सके.





