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भूमि के मालिक को 58 मरले जमीन पर मिला कब्जा

Shantanu Roy
20 Jun 2026 4:35 PM IST
भूमि के मालिक को 58 मरले जमीन पर मिला कब्जा
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Damtal. डमटाल। इंदौरा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा निजी भूमि पर सडक़ निर्माण कर वर्षों तक मुआवजा न देने का मामला अब एक ऐतिहासिक कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। सब जज इंदौरा ने भूमि स्वामी के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उसकी 58 मरले भूमि का कब्जा वापस सौंपने के आदेश जारी कर दिए हैं। अदालत के आदेशों के बाद भूमि मालिक रघुबीर सिंह ने अपनी भूमि पर कब्जा लेते हुए इंदौरा-मोहटली-ृपठानकोट मार्ग को कांटेदार तार लगाकर बंद कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में आवागमन प्रभावित हो गया है। यह मामला मोहटली निवासी रघुबीर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह की भूमि से संबंधित है। लगभग पौने तीन कनाल भूमि पर लोक निर्माण विभाग ने सडक़ का निर्माण किया था। लेकिन इसके बदले आज तक कोई मुआवजा अदा नहीं किया गया। इसके चलते रघुबीर सिंह ने वर्ष 2012 में सिविल कोर्ट इंदौरा में वाद दायर किया था। वर्ष 2017 में सिविल कोर्ट ने रघुबीर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को मुआवजा देने के
आदेश दिए।

इसके खिलाफ विभाग द्वारा दायर अपील को वर्ष 2019 में सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया। बाद में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला ने भी वर्ष 2023 में विभाग की अपील को निरस्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि या तो भूमि स्वामी को मुआवजा दिया जाए अथवा उसकी भूमि वापस की जाए। रघुबीर सिंह के अधिवक्ता नितीश बेहल ने बताया कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद विभाग ने मुआवजा राशि जारी नहीं की। इसके बाद दायर निष्पादन एक्जीक्यूशन याचिका पर सुनवाई करते हुए सिविल कोर्ट इंदौरा ने 15 जनवरी 2026 को लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह इंदौरा तथा डिवीजन कार्यालय की संपत्तियों को अटैच करने के आदेश भी जारी किए थे। इसके बावजूद भी लोक निर्माण विभाग द्वारा रघुबीर सिंह को मुआबजा राशि जारी नहीं की गईए जिसके बाद 02.06.2026 को सिविल जज इंदौरा ने कड़ा रुख अपनाते हुए भूमि मालिक को उसकी जमीन का कब्जा वापस देने के आदेश पारित कर दिए। सिविल जज इंदौरा के आदेशों के अनुसार 19 जून को रघुबीर सिंह ने सिविल जज इंदौरा के आदेशों के अनुसार पुलिस की सहायता से इस मार्ग पर कांटेदार तार लगाकर मार्ग को बंद कर दिया है। इंदौरा की पूर्व विधायक रीता धीमान के प्रयासों से इसी सडक़ पर रेलवे अंडरपास का निर्माण करवाया गया था। अंडरपास बनने से इंदौरा क्षेत्र की लगभग 30 से 40 पंचायतों के लोगों को पठानकोट तथा अन्य अस्पतालों व दैनिक आवागमन के लिए बड़ी राहत मिली थी।
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