
बता दें कि ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन की शिकायत के अनुसार 23 जून को एसडीएम के रूप में तैनात ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट आईएएस रिंकू सिंह राही मुख्य अग्निशमन अधिकारी, पीडब्ल्यूडी व नलकूप के अधिशासी अभियंता और जिला उद्यान अधिकारी के साथ उरई-जालौन मार्ग पर ग्राम भिटारा स्थित कोल्ड स्टोरेज के निरीक्षण को पहुंचे थे। ब्लॉक प्रमुख का आरोप है कि एसडीएम ने अग्निशमन संबंधी अभिलेख ढाई मिनट में मांगे।
पंप चालू कराने और कार्यालय से अभिलेख मंगाने में समय लगा, इसी बीच एसडीएम ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। ब्लॉक प्रमुख का आरोप है कि अभिलेख लाने की बात कहने पर भी एसडीएम ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, थप्पड़ मारने का प्रयास किया और धक्का दिया। पूरी घटना कोल्ड स्टोरेज के सीसीटीवी में कैद है। मौके पर मौजूद 50 से अधिक किसान-मजदूर गवाही को तैयार हैं। ब्लॉक प्रमुख ने सीसीटीवी फुटेज डीएम को सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि शासन को सूचित कर दिया है। जिला स्तर पर न्याय न मिलने पर वे सीसीटीवी और 50 किसानों के हलफनामों के साथ राजभवन व हाईकोर्ट जाएंगे। इस संबंध में ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने बताया की कोल्ड स्टोर का निरीक्षण के दौरान भारी कमियां पाई गई थीं जिसको पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा गया है। निष्पक्ष जांच को बाधित करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मैंने किसी के साथ अभद्रता नहीं की है। आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह के साथ भले ही कई विवाद जुड़े हों लेकिन उनकी गिनती ईमानदार अफसरों में होती है। 2008 में जब उन्होंने मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले को पकड़ा था। तब उन पर जानलेवा हमला हुआ। उन्हें सात गोलियां मारी गई थी।
शाहजहांपुर में बतौर एसडीएम रहते रिंकू सिंह के साथ बड़ा विवाद जुड़ा था। उन्होंने एक वकील के मुंशी को तहसील परिसर में खुले में पेशाब करते हुए पकड़ लिया और उठक-बैठक कराई थी। इससे वकील आक्रोशित हो गए और रिंकू सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। मामला इतना बढ़ गया कि रिंकू सिंह ने खुल वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक की थी और माफी मांगनी पड़ी थी।





