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बिजली विभाग को हाईकोर्ट की फटकार, लाइन काटने की धमकी देकर नहीं वसूल सकते बकाया

Nil dhankar
26 May 2026 6:56 AM IST
बिजली विभाग को हाईकोर्ट की फटकार, लाइन काटने की धमकी देकर नहीं वसूल सकते बकाया
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इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि बिजली विभाग पुरानी बिलिंग गलती के आधार पर अतिरिक्त मांग तो उठा सकता है, लेकिन उपभोक्ता को बिजली काटने की धमकी देकर वसूली नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी राशि की वसूली के लिए विभाग को दीवानी उपाय अपनाना होगा। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश ओम फूड मैन्युफैक्चरिंग सेंटर की याचिका पर दिया। याचिका में कहा गया था कि कंपनी का वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन था और 14 जुलाई 2023 को उसका लोड बढ़ाकर 140 केवी कर दिया गया। इसके बाद कंपनी नियमित रूप से बिजली बिल जमा करती रही। लगभग दो वर्ष बाद बिजली विभाग ने यह कहते हुए 54 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त मांग कर दी कि पहले गलत टैरिफ के आधार पर बिल जारी हो रहे थे। बाद में यह मांग बढ़ाकर 62 लाख रुपये से अधिक कर दी गई।

कोर्ट ने कहा कि लोड बढ़ाना और मीटर लगाना उपभोक्ता के हाथ में नहीं था तथा विभाग ने बिजली चोरी का कोई आरोप भी नहीं लगाया। मामला केवल विभागीय गलती का है, इसलिए उपभोक्ता को दंडित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यदि बिलिंग में किसी वास्तविक गलती का बाद में पता चलता है तो अतिरिक्त मांग उठाई जा सकती है, लेकिन बिजली कनेक्शन काटकर दबाव बनाना कानूनन मान्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 56 के तहत विभाग को 15 दिन का नोटिस देकर कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन दो वर्ष से अधिक पुराने बकाये की वसूली के लिए जबरन बिजली विच्छेदन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभाग मांग राशि को बार-बार बढ़ाता नहीं रह सकता। खंडपीठ ने कहा कि विभाग द्वारा जारी नोटिसों में केवल “गलती पकड़े जाने” की बात कही गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गलती क्या थी और गणना किस आधार पर की गई। बिल में रिबेट सहित विभिन्न मदों का भी स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। अदालत ने इसे पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि बिजली विभाग पूरी गणना, कथित गलती और दिए गए रिबेट का स्पष्ट ब्यौरा याची को उपलब्ध कराए। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होता है तो विभाग को रकम की वसूली के लिए सिविल उपाय अपनाना होगा, न कि बिजली काटने जैसी दमनात्मक कार्रवाई। इसी के साथ अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।

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