लड़की को पबजी की लत, असली हथियार चलाना चाहती थी, पुलिस ने किया रेस्क्यू

यूपी। मारधाड़ और हथियारों के ऑनलाइन गेम किशोरावस्था में दिमाग पर कितना बुरा असर डालते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण हैं आगरा में धर्मांतरण की शिकार हुई जोया। जोया सगी बहनों में छोटी है और धर्मांतरण से पहले उसका दूसरा नाम था। जब हाईस्कूल में थी, तब लॉकडाउन लग गया। किताबें छूट गईं हाथ में मोबाइल आ गया। उस समय उसे पबजी का चस्का लग गया। दिन और रात सिर्फ पबजी में गोलियां चलाईं। इस दौरान वह सपने में भी गोलियां चलाकर दूसरों को मारती और खुद को बचाती। बड़ी बहन ने इसी का लाभ उठाकर उसका ब्रेनवॉश किया था।
धर्मांतरण गैंग के चंगुल से मुक्त हुईं आगरा की सगी बहनों की काउंसलिंग चल रही है। छोटी वाली बड़ी बहन से भी कट्टर है। उसके सिर पर मुजाहिदा बनने का भूत सवार है। एक युवती इतनी खतरनाक बात कैसे कर सकती है, यह जानने के लिए काउंसलरों ने स्कूल की बातचीत शुरू की। पता चला कि वह बालूगंज स्थित एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ती थी। हाईस्कूल में थी तो लॉकडाउन लग गया। पढ़ाई ऑनलाइन होने लगी। इसी दौरान उसने पबजी खेलना शुरू कर दिया। मां इस बात पर डांटती थी। तब बड़ी बहन इस्लाम के प्रति आकर्षित हो चुकी थी। वह छोटी बहन से अपने दिल की बात किया करती थी। छोटी बहन हकीकत में हथियार उठाना चाहती थी। गोलियां चलाना चाहती थी। वह गेम को हकीकत में जीना चाहती थी।
बड़ी बहन ने यह जानकारी गैंग के सदस्यों को दी। उन्होंने छोटी बहन की उम्र पूछी। उसके बालिग होने तक इंतजार करने के लिए कहा। छोटी बहन के बालिग होने के बाद बड़ी बहन ने घर छोड़ने की योजना बनाई। काउंसलिंग के दौरान छोटी बहन से कहा गया कि यह गलत है मगर वह अभी यह समझने को पूरी तरह तैयार नहीं है। काउंसलरों ने बड़ी बहन से बातचीत की। यह जानने का प्रयास किया वह किन बातों से परेशान थी। बातचीत में पता चला कि उनके चाचा ने दूसरी शादी की थी। पहली पत्नी को छोड़ दिया था। बड़ी बहन ने काउंसलर से कहा कि हिंदू धर्म में एक ही शादी कर सकते हैं। इसके बावजूद चाचा ने दूसरी शादी कर ली। इस्लाम में ऐसा नहीं है। वहां पहले से पता रहता है कि पति कई निकाह कर सकता है। काउंसलर ने उसे समझाया कि छोटी बहन मुजाहिदा बनना चाहती है, जो अपराध है। आज दोनों बहनें पीड़ित हैं। इसी गैंग से जुड़ी रहीं तो आगे चलकर वे भी आरोपित बन जाएंगी। मनोरोग चिकित्सक डॉ.सागर लवानिया ने बताया कि पबजी जैसे गेम मस्तिष्क में एक न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। आनंद और पुरस्कार की भावना जागती है। गेम में हर उपलब्धि के बाद मन और अधिक चाहता है और इस तरह लत लगने की प्रवृत्ति विकसित होती है। लत लगने के बाद खिलाड़ी वास्तविक दुनिया की तुलना में आभासी दुनिया में अधिक सहज महसूस करता है। अधिकांश समय गेम खेलता है। खेल न खेलते समय भी उसके बारे में सोचता है। लगातार गेम खेलने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। मोटापा बढ़ता है। सामाजिक अलगाव बढ़ जाता है। नींद का पैटर्न बाधित होता है। व्यवहार आक्रामक हो जाता है। पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है। याददाश्त कमजोर हो जाती है। रिश्तों में रुचि कम हो जाती है। माता-पिता टोकते हैं तो दुश्मन लगते हैं। लत न लगे इसके लिए शुरुआत में ही उपाय करें और डॉक्टर से मिलें।





