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शिमला। राजधानी शिमला के एजी ऑफिस से हिमाचल के पांचवें लेख सप्ताह यानी ऑडिट का शुभारंभ राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया। राज्यपाल ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में लेखा विभाग की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यह विभाग अपनी तथ्य आधारित रिपोर्ट और विभागों को वित्तीय सुझावों के जरिए लोक कल्याणकारी सुशासन की आधारशिला का काम करता है। राज्यपाल शुक्रवार को पांचवें लेखा सप्ताह (ऑडिट वीक) के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग (आईए एंड एडी) द्वारा शिमला के गॉर्टन कैसल भवन परिसर (एजी कार्यालय) में किया गया। ऑडिट वीक 2025 का आयोजन विभाग की राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी, प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) और प्रधान महालेखाकार (लेखांकन एवं अनुश्रवण) द्वारा किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि लेखा विभाग लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है, जो जवाबदेही, सुशासन, सार्वजनिक संस्थानों का विधि हित और जनहित में इस्तेमाल सुनिश्चित करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और विकासशील राज्य की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने में इस विभाग का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी (एनएएए), शिमला के महानिदेशक एस आलोक ने बताया कि विभाग द्वारा लेखा परीक्षा को आसान और कागज रहित बनाने के लिए हाइब्रिड और रिमोट ऑडिट जैसे अहम कदम उठाए गए हैं। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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