
यूपी। खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर जेल भेजने की धमकी देने और 85 लाख रुपये ठगने वाले अपराधी देवाशीष को सात साल की सजा सुनाई गई है। यह सजा गुरुवार को स्पेशल सीजेएम कस्टम अमित कुमार ने सुनाई। इस मामले में साइबर थाना लखनऊ से विवेचना और कोर्ट में आरोपित के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव का दावा है कि देश में डिजिटल अरेस्ट के मामले में 14 महीने में यह पहली सजा हुई है। देवाशीष मूल रूप से आजमगढ़ के अजमतगढ़ के मसौना का रहने वाला है।अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र चौहान ने अदालत को बताया कि 15 अप्रैल 2024 को डॉ. सौम्या गुप्ता केजीएमयू में ड्यूटी कर रही थी। इस बीच देवाशीष ने उन्हें फोन किया। खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बता कहा कि वह इंदिरा गांधी एयरपोर्ट दिल्ली से बोल रहे हैं। उनके नाम पर जो कार्गो बुक है उसमें कुछ जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, 140 ग्राम एमडीएम पाया गया है जो कि अपराध की श्रेणी में आता है। देवाशीष ने धमकाते हुए कॉल को किसी अन्य को ट्रांसफर कर दिया कहा कि अब सीबीआई के अधिकारी बात करेंगे।
इसके बाद फर्जी सीबीआई के अधिकारी ने उसे डरा धमकाकर बात करते हुए कहा कि उसे सात साल की सजा हो सकती है। यद्यपि सौम्या गुप्ता ने उस व्यक्ति से कहा है कि कार्गो में जो भी सामान मिला है उससे उनका कोई लेना देना नहीं है। इसके बावजूद उस व्यक्ति ने बैंक खाता, पैन नंबर एवं सारी संपत्ति का विवरण डरा धमकाकर उससे ले लिया और भिन्न भिन्न चार बैंक खातों में 85 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिया गया। 10 दिन 25 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट किया।
पुलिस उपायुक्त अपराध कमलेश कुमार दीक्षित ने बताया कि मामले की विवेचना में लगे साइबर थाने के इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव और उनकी टीम ने इस मामले में लगातार कोर्ट में पैरवी की। इलेक्ट्रानिक और वैज्ञानिक साक्ष्य कोर्ट के समझ मजबूती से प्रस्तुत किया।





