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Karnataka. कर्नाटक। कर्नाटक से जुड़ा एक दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि राज्य में साइकिल चालकों से ₹25 टोल वसूला जा रहा है। इस दावे को लेकर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इसे लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिल रही है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। वायरल पोस्ट्स और कुछ ऑनलाइन दावों में कहा जा रहा है कि कर्नाटक में एक ऐसी व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत साइकिल सवारों से भी टोल टैक्स लिया जा रहा है। इन दावों में इसे आम जनता, मजदूरों और कम आय वर्ग पर अतिरिक्त बोझ बताया जा रहा है।
अब साइकिल पर भी टोल टैक्स?
— The Hindu Association (@HinduAsociation) May 18, 2026
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने तो हद ही कर दी! 🚲
अब साइकिल वालों से भी ₹25 टोल वसूला जा रहा है!
गरीब, मजदूर, आम जनता आखिर जाए तो जाए कहाँ?
क्या अब पैदल चलने पर भी टैक्स लगेगा?
देश की जनता से वसूली बंद कब होगी?
कुछ तो शर्म करो कांग्रेस वालो pic.twitter.com/36EEQ7BPmz
कई पोस्ट्स में यह भी कहा गया है कि इससे रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अब तक किसी भी आधिकारिक सरकारी अधिसूचना, परिवहन विभाग के आदेश या राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से ऐसी किसी नीति की पुष्टि नहीं की गई है, जिसमें साइकिल चालकों से टोल वसूली की बात कही गई हो। आमतौर पर टोल टैक्स व्यवस्था में मोटर वाहनों जैसे कार, बस, ट्रक और अन्य यांत्रिक वाहनों पर शुल्क लागू होता है, जबकि साइकिल और पैदल यात्रियों को इससे छूट दी जाती है।
सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे सामने आने के बाद लोगों में भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। कुछ उपयोगकर्ता इसे सरकार की नीति बताते हुए आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे गलत या भ्रामक जानकारी भी बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी होता है। परिवहन और सड़क अवसंरचना से जुड़े नियमों के अनुसार, टोल प्लाजा पर शुल्क संरचना वाहन के प्रकार और भार क्षमता के आधार पर तय की जाती है। साइकिल जैसे गैर-मोटर चालित वाहनों के लिए सामान्यतः किसी भी प्रकार का टोल शुल्क निर्धारित नहीं होता है।
फिलहाल कर्नाटक सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस वायरल दावे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इसे लेकर स्पष्ट रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। सोशल मीडिया पर अक्सर अधूरी या गलत जानकारी तेजी से फैलती है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए किसी भी खबर या दावे को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच आवश्यक है। इस बीच, यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है और विभिन्न लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे जनहित से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे अफवाह करार दे रहे हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि साइकिल चालकों से टोल वसूली के दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और मामला केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी तक सीमित प्रतीत हो रहा है।
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