अपराध में लिप्त मंत्री के बेटों पर कार्रवाई करने में लाचार हैं मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

महाराष्ट्र। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने पूछा कि मंत्रियों के बच्चे अपराध कर खुला घूमते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें तलाश नहीं पाती। कहा कि क्या मुख्यमंत्री इतने लाचार हैं कि वे उस मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते, जिसका बेटा एक आपराधिक मामले में फरार है। जस्टिस माधव जामदार की अदालत गुरुवार को शिवसेना मंत्री भरत गोगवाले के बेटे विकास गोगवाले की गिरफ्तारी पर रोक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
विकास का नाम महाड में निकाय चुनाव के दौरान हिंसक झड़प में एक आरेापी के तौर पर शामिल है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या राज्य के मुख्यमंत्री इतने लाचार हैं कि वे एक भी मंत्री के खिलाफ कुछ नहीं कहते? मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं और आजाद घूमते हैं और वे अपने माता-पिता के संपर्क में रहते हैं लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती?’ अदालत ने निर्देश दिया कि शुक्रवार की सुनवाई से पहले विकास को आत्मसमर्पण के लिए कहें। अदालत की कड़ी फटकार के बाद सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत से कहा कि मंत्री गोगवाले अपने बेटे से बात करेंगे। वह सुनिश्चित करेंगे कि विकास शुक्रवार को पुलिस के सामने सरेंडर कर दे। विकास ने सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने पर हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वह अभी भी फरार है।
मामला रायगढ़ जिले के महाड में दो दिसंबर को शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प का है। एनसीपी की ओर से दर्ज रिपोर्ट में विकास गोगवाले, उनके चचेरे भाई महेश गोगवाले पर आरोप हैं। वहीं, दूसरे पक्ष की रिपोर्ट में पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे और एनसीपी नेता श्रीयांश जगताप का नाम है। अदालत ने श्रीयांश जगताप को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी।





