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महिला पत्रकारों से कथित मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

SHIDDHANT
13 Oct 2026 11:22 PM IST
महिला पत्रकारों से कथित मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
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दिल्ली: दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर आरोपों पर जवाब देने को कहा है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पुलिस की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ थी। अदालत इस मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी।
महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस के अधिकारी को किया तलब
दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण देने को कहा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को तय की है। इस मामले में पत्रकारों के संगठनों की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें प्रदर्शन स्थलों पर रिपोर्टिंग करने वाले मीडियाकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पुलिस की कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से जवाब देने को कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) की याचिका का उल्लेख किया। इस याचिका में विरोध प्रदर्शनों की खबरें जुटाने वाली महिला पत्रकारों समेत सभी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है।
याचिका का जिक्र होने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामले को समझने और आरोपों पर जानकारी देने के लिए दिल्ली पुलिस के किसी वरिष्ठ अधिकारी का अदालत में मौजूद रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखना होगा। इंदिरा जयसिंह ने अदालत को यह भी बताया कि मामले की जानकारी सॉलिसिटर जनरल को पहले ही दी जा चुकी है। अब अदालत बृहस्पतिवार को इस विषय पर आगे सुनवाई करेगी।
10 अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन का आरोप
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने फ्रीडम स्पीच कलेक्टिव की ओर से दायर अवमानना याचिका का भी उल्लेख किया। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित मारपीट करके पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन किया। बताया गया है कि उस आदेश में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को परेशान नहीं करने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों को कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने भी अदालत के सामने इसी तरह के आरोपों से जुड़ी एक दूसरी याचिका का जिक्र किया। इन याचिकाओं के जरिए पत्रकारों के साथ हुए कथित व्यवहार को अदालत के संज्ञान में लाया गया है।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए क्या मांग की गई?
NWMI ने केंद्र सरकार से ऐसे निर्देश जारी करने की मांग की है, जिनसे पत्रकारों को अपना काम करते समय दुर्व्यवहार से सुरक्षा मिल सके। याचिका में कहा गया है कि महिला पत्रकारों को केवल प्रदर्शन, सार्वजनिक सभा, भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई या किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूद रहने के कारण निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता संस्था ने पत्रकारों को कथित उत्पीड़न, धमकी, मनमानी हिरासत और जबरन हटाए जाने जैसी कार्रवाइयों से सुरक्षा देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पत्रकारों को बिना किसी बाधा के काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे सार्वजनिक घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग कर सकें।
बृहस्पतिवार को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर अलग-अलग याचिकाओं का उल्लेख किया गया है। इनमें महिला पत्रकारों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस की कथित कार्रवाई और पहले दिए गए न्यायिक आदेश के पालन का मुद्दा उठाया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा है, ताकि आरोपों पर अदालत के सामने स्पष्टीकरण दिया जा सके।
अब बृहस्पतिवार को होने वाली सुनवाई में मामले पर आगे विचार किया जाएगा। फिलहाल, पत्रकारों के साथ मारपीट और आदेश के उल्लंघन से जुड़े आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस का पक्ष और अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
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