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धर्म परिवर्तन के मामले में चार आरोपियों को राहत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR और चार्जशीट की रद्द

SHIDDHANT
13 Oct 2026 11:17 PM IST
धर्म परिवर्तन के मामले में चार आरोपियों को राहत, बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR और चार्जशीट की रद्द
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नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर दबाव बनाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने महाराष्ट्र के अमरावती निवासी चार लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया है। चारों पर एक दंपती को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं का प्रस्ताव देने का आरोप था। अदालत ने कहा कि केवल धर्म परिवर्तन के लिए कहने से किसी धार्मिक समुदाय की भावनाओं को जानबूझकर आहत करने का अपराध स्थापित नहीं होता।
पैसे और घर बनवाने का दिया था प्रस्ताव
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। इसके बदले हर महीने आर्थिक सहायता, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने और घर बनवाने का भरोसा देने का आरोप लगाया गया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की मांग की।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
नागपुर बेंच के न्यायमूर्ति एम. डब्ल्यू. चांदवानी ने 6 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा कि आरोपों को सही मान लेने पर भी धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से आहत करने का अपराध स्थापित नहीं होता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी धर्म का प्रचार करने या धर्म परिवर्तन के लिए आग्रह करने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि किसी दूसरे धर्म का अपमान किया गया है।
धर्मांतरण विरोधी कानून पर भी टिप्पणी
अदालत ने कहा कि कथित घटना वर्ष 2025 की है। उस समय महाराष्ट्र में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने पर रोक लगाने वाला संबंधित कानून लागू नहीं था।
महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 को 28 अगस्त 2026 से प्रभावी किया गया था। इसलिए बाद में लागू हुए कानून को पहले की कथित घटना पर लागू नहीं किया जा सकता।
चार आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत
हाईकोर्ट ने जोसेफ खुड़ावंत, उनके बेटे विक्टर खुड़ावंत, बहू एल्विना खुड़ावंत और सामाजिक कार्यकर्ता अनंत मानकर के खिलाफ दर्ज एफआईआर तथा चार्जशीट रद्द कर दी।
चारों अमरावती के निवासी हैं। अदालत ने आरोपों और कानूनी प्रावधानों की समीक्षा के बाद यह फैसला सुनाया।
इस निर्णय में अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाएं आहत करने का अपराध स्थापित करने के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों के आवश्यक तत्वों का होना जरूरी है। केवल धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप उस विशेष अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
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