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आतंकी ने बदली पहचान, कई राज्यों में चलाता रहा नेटवर्क
Jammu जम्मू। भारत में फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए 14 साल से अधिक समय से रह रहे लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र बनाए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत में फर्जी पहचान पत्र बनवाना इतना आसान है? एसपी वैद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उसका नाम उमर हैरिस है और वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है तथा उसके खिलाफ वहां आपराधिक मामले दर्ज हैं। यहां तक कि वह जेल भी जा चुका है। पाकिस्तान की आईएसआई जैसी एजेंसियां अक्सर ऐसे व्यक्तियों को कट्टरपंथी बनाती हैं और उन्हें लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों में भर्ती करती हैं। उसे प्रशिक्षित किया गया और भारत में घुसपैठ कराई गई, जहां उसने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी अपनी गतिविधियां चलाईं।
उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि उसने राजस्थान में 'सज्जाद' नाम से फर्जी पहचान बनाई और शादी के प्रमाण पत्र सहित जाली दस्तावेज भी हासिल किए। सवाल यह है कि क्या भारत में फर्जी पहचान पत्र बनवाना इतना आसान है? क्या भारत का पासपोर्ट, मैरिज सर्टिफिकेट, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड—ये सब बनाना इतना आसान है?
उन्होंने कहा कि आरोपी सऊदी अरब कैसे गया? इतनी अच्छी इमिग्रेशन व्यवस्था होने के बाद भी वह कैसे निकल गया? एनआईए को इसकी जांच करनी चाहिए कि उसने फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज कैसे हासिल किए। इसमें कौन लोग शामिल हैं? अगर सब कुछ फर्जी था तो वह देश से बाहर कैसे निकल गया? उन्होंने कहा कि इस तरह के कुछ मामले सामने आते हैं, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे कितने लोग हैं? कितनी जानकारियां लीक की जा रही हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। कमियों को उजागर कर उन पर काम करना चाहिए, क्योंकि यह देश की सुरक्षा का मामला है। ऐसे मामले देश के लिए खतरा हैं, क्योंकि ऐसे लोग भारतीय नागरिक के रूप में कहीं भी जा सकते हैं।
श्रीनगर में दो अमेरिकी पर्यटकों को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़े जाने पर एसपी वैद ने कहा कि यह भी देश के लिए खतरा हो सकता है। अच्छी बात है कि हमारी एजेंसियों ने उन्हें पकड़ लिया है। इसकी जांच होनी चाहिए कि वे इसे कैसे लेकर आए और किसने अनुमति दी। ईरान-अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत रद्द होने पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे पर भरोसा नहीं है, ऐसे में इस तरह की बातचीत के विफल होने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत की जिम्मेदारी पाकिस्तान को दी है तो ऐसे में सफलता की संभावना कम ही दिखती है।
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