
जंगली जानवर को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम लगातार पिंजरा लगा रही है। पिंजरे के अंदर बकरी को रखा जा रहा है। इसके बाद भी आदमखोर जानवर टीम को चकमा देकर फरार हो जा रहा है। वन विभाग गांव के बाहर कैमरा लगाकर नजर भी रख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी केवल खानापूर्ति करने के लिए गांव में आते हैं और फिर चले जाते हैं। बच्ची की मां ने बताया कि वह अपनी बच्ची को लेकर घर के बाहर बैठी थी। इसी दौरान एक जंगली जानवर आया और उसके पास से बच्ची को उठा ले गया। उन्होंने जब तक शोर मचाया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची के पिता दिनेश ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, "वह भेड़िया जैसा दिखाई दे रहा था। मेरी पत्नी ने शोर मचाया, लेकिन, बच्ची को जानवर से बचाने में काफी देर हो गई। रातभर खोजने पर बच्ची नहीं मिली। सुबह चार बजे बच्ची का शव खेत में मिला।"
ग्रामीण शोभित ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, "गांव में डर का माहौल बना हुआ है, लोग घर से कम निकल रहे हैं। रात में कोई भी घर के बाहर नहीं सोता है। सब लोग छतों पर सोने के लिए मजबूर हैं। अधिकारी केवल आते हैं, घूमकर चले जाते हैं। हमारा कोई ध्यान देने वाला नहीं है।"ग्रामीण कुलदीप ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी सूचना मिलने पर ही गांव में आते हैं, केवल घूमकर वापस चले जाते हैं। अभी तक जानवर को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वन संरक्षक डॉ. सम्मारन ने बताया, "ड्रोन से इलाके पर नजर रखी जा रही है। हमें कोई निशान नहीं मिला है। जानवर को पकड़ने के लिए 12 टीम का गठन किया गया है और 24 घंटे निगरानी की जा रही है। बच्ची के शव के पास से मिले सैंपल को जांच के लिए भेज दिया गया है। इस इलाके से 25 किलोमीटर दूर अभी कुछ दिन पहले भेड़िया को पकड़ा गया है।"





