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शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अनेक निर्णय लिए गए। मंत्रिमंडल ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अंतर्गत कार्यरत मान्यता प्राप्त डीएम एमसीएच तथा डीआरएनबी योग्यता प्राप्त सुपर-स्पेशियलिटी संकाय सदस्यों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस यानी एनपीए प्रदान करने का निर्णय लिया। संशोधित व्यवस्था के अनुसार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को 40,000 के स्थान पर 50,000 रुपए, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को 45,000 के स्थान पर 60,000 रुपए तथा तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को 50,000 के स्थान पर 65,000 रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड मिलेगा। साथ ही अब राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को 60,000 के स्थान पर 1.50 लाख रुपए जबकि राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को 40,000 के स्थान पर एक लाख रुपए की नकद राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सेवा विस्तार नहीं दिए जाने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में नंबरदारों के मासिक मानदेय में 500 रुपए की वृद्धि कर 4,500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए प्रतिमाह करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय को प्रथम अप्रैल, 2026 से 5,800 रुपए से बढ़ाकर 6,800 रुपए करने का निर्णय लिया।
मंत्रिमंडल ने आईजीएमसी तथा टीएमसी में बीएससी मेडिकल टेक्नोलॉजी रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट तथा बैचलर ऑफ रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी पाठयक्रम आरंभ करने को स्वीकृति दी। दोनों संस्थानों में प्रत्येक पाठयक्रम के लिए प्रतिवर्ष 30-30 सीटें निर्धारित की गई हैं। अब स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के उपरांत जनरल ड्यूटी ऑफिसर्स जीडीओ तथा डायरेक्ट अभ्यर्थी यदि चमियाना अस्पताल में वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में अथवा आईजीएमसी, शिमला को छोडक़र अन्य किसी भी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रेडियोडायग्नोसिस विशेषज्ञता में सेवाएं देते हैं, तो उन्हें अनिवार्य फील्ड पोस्टिंग से छूट प्रदान की जाएगी। यह व्यवस्था आगामी छह वर्षों तक प्रभावी रहेगी। मंत्रिमंडल की बैठक में लापता बच्चों से संबंधित मामलों की निगरानी के लिए पुलिस थानों में विधिक स्वयंसेवकों लीगल वालंटियर्स की इम्पैनलमेंट को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने फोजल जलविद्युत परियोजना की क्षमता को नौ से बढ़ाकर 16 मेगावाट करने को भी स्वीकृति दी। मंत्रिमंडल ने जल शक्ति विभाग की जलापूर्ति, सिंचाई तथा सीवरेज पंपिंग योजनाओं में ऊर्जा दक्षता उपायों को लागू करने के लिए एनर्जी सर्विस कंपनी मॉडल को अपनाने को भी मंजूरी प्रदान की।
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