भारत

सोनम रघुवंशी को सरेंडर का आदेश, सुको से जमानत रद्द

Nil dhankar
23 July 2026 1:43 PM IST
सोनम रघुवंशी को सरेंडर का आदेश, सुको से जमानत रद्द
x

दिल्ली/एमपी। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मुकदमे की सुनवाई में देरी होती है तो छह महीने बाद सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं।

सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसी पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने कहा कि मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक सिर्फ चार गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और सोनम को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली थी। सोनम ने सरेंडर नहीं किया था, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी को सरेंडर बताया जा रहा है। उन्होंने अदालत से कहा कि सोनम जमानत की सभी शर्तों का पालन कर रही हैं और उनके फरार होने का कोई खतरा नहीं है।

वहीं, मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार को लेकर दी जा रही दलीलों का कोई आधार नहीं है, क्योंकि आरोपी ने खुद सरेंडर किया था और इस बात का उल्लेख चार्जशीट में भी दर्ज है। जिस दस्तावेज को लेकर विवाद किया जा रहा है, उसमें सिर्फ एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में तकनीकी गलती हुई थी। इतनी छोटी तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जमानत बरकरार रहती है तो सोनम रघुवंशी के फरार होने की आशंका बनी रहेगी। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के वकील को दो विकल्प दिए थे। अदालत ने पूछा था कि क्या सोनम स्वयं सरेंडर करेंगी या फिर कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने पर फैसला सुनाए। अपने जवाब में सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह बेगुनाह हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और केवल आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बदलते समाज और नई पीढ़ी को लेकर भी अहम टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा, "आज की पीढ़ी हमसे ज्यादा जानकार हो सकती है, लेकिन दबाव से निपटने के मामले में ज्यादा कमजोर है।" इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा, "जानकारी ज्यादा है, लेकिन ज्ञान नहीं।" जस्टिस वराले ने टिप्पणी करते हुए कहा, "आजकल व्हाट्सऐप पर जो कुछ भी साझा किया जाता है, उसे ही ज्ञान मान लिया जाता है।" अदालत ने कहा कि आज की पीढ़ी बहुत बेचैन है और हर समस्या का तुरंत समाधान चाहती है। संयुक्त परिवार में रहने से लोग निराशा और परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाना सीखते हैं, जबकि न्यूक्लियर फैमिली में छोटी-छोटी बातों पर लोग परेशान हो जाते हैं। अदालत ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि उसने हाल ही में एक होटल में देखा कि रोते हुए बच्चे को शांत कराने के लिए माता-पिता ने तुरंत मोबाइल फोन दे दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि बच्चों की भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें गैजेट थमा दिए जा रहे हैं। इस पर एसजी तुषार मेहता ने भी कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम के बढ़ने से डिप्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।

Next Story