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रेलवे को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, मृत यात्री के आश्रित को 8 लाख मुआवजा दिलाया

Nil dhankar
18 July 2026 6:55 AM IST
रेलवे को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, मृत यात्री के आश्रित को 8 लाख मुआवजा दिलाया
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दिल्ली। ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले एक यात्री के कानूनी दस्तावेजों में सेकंड क्लास पैसेंजर यानी कि द्वितीय श्रेणी का यात्री शब्द के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की शीर्ष अदालत ने इस शब्दावली को भारत के सामाजिक इतिहास में मौजूद वर्ग विभाजन से जोड़ते हुए इसे भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ और अपमानजनक करार दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़ित परिवार के हक में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए रेलवे को मुआवजा देने का आदेश दिया है।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अपने 19 पन्नों के फैसले में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया। अदालत ने कहा, "दस्तावेजों और मैनुअल को देखने के दौरान एक बात ने हमारा ध्यान खींचा वह थी मृतक के लिए सेकंड क्लास पैसेंजर शब्द का उपयोग। भले ही यह शब्द यात्री द्वारा यात्रा के लिए किए गए खर्च यानी कि टिकट की कीमत से जुड़ा हो सकता है, लेकिन हमारा सुझाव है कि यह क्लास शब्द कोच के साथ जोड़ा जाना चाहिए, न कि यात्री के साथ। हमारे देश में वर्ग विभाजन के इतिहास को देखते हुए किसी व्यक्ति को इस तरह संबोधित करना संविधान की भावना के विपरीत है।"

यह मामला साल 2015 का है। चंद्रकांत ठक्कर नाम के एक व्यक्ति की चलती ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई थी। रेलवे दावा न्यायाधिकरण (RCT) ने चंद्रकांत की पत्नी की मुआवजे की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि दुर्घटना के बाद मृतक के पास से कोई वैध टिकट बरामद नहीं हुआ था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी ट्रिब्यूनल के इस फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद मृतक की पत्नी ने दोनों फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और 4 लाख मुआवजे के साथ 18% ब्याज की मांग की। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके पति बिना टिकट यात्रा नहीं कर रहे थे, बल्कि टिकट उनके बैग में था जो हादसे के बाद गायब हो गया और बरामद नहीं हो सका।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए साफ किया कि शव के पास से टिकट न मिलने मात्र से किसी व्यक्ति का वैध यात्री होने का दर्जा खत्म नहीं हो जाता। कोर्ट ने रीना देवी और डोली रानी साहा बनाम भारत सराकर केस के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल इस आधार पर मुआवजा रोकने का फैसला गलत था कि टिकट नहीं मिला। कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया कि वह मृतक की पत्नी को 8,00,000 का मुआवजा प्रदान करे।

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