आश्रम में सुसाइड के मामले बढ़े, हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से मांगा जवाब

महाराष्ट्र। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पालघर में आश्रम शाला में दो छात्रों की आत्महत्या के मामले पर शुक्रवार को चिंता जताई. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या आवासीय जनजातीय स्कूल में सभी सुरक्षा और संरक्षा उपाय लागू हैं. यह घटना पालघर जिले के वाडा तालुका में अंबीस्ते स्थित एक सहायता प्राप्त माध्यमिक आश्रम स्कूल में हुई थी. कक्षा 9 और 10 के दो नाबालिग छात्रों ने बुधवार देर रात फांसी लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी.
आत्महत्या करने वाले छात्रों की पहचान देवीदास परशुराम नवले (कक्षा 10) और मनोज सीताराम वड़ (कक्षा 9) के रूप में हुई है. लड़कों ने हॉस्टल परिसर के अंदर कपड़े सुखाने वाली रस्सी का उपयोग किया था.जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और संदेश पाटिल की बेंच ने कहा, "हमने आज अखबार में पालघर के स्कूल में दो बच्चों की आत्महत्या के बारे में पढ़ा, क्या यह इस मामले में शामिल होगा? जिस स्कूल में यह घटना हुई है, उसका क्या?" अदालत ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि आश्रम शालाएं भी अन्य सरकारी, निजी या सहायता प्राप्त स्कूलों की तरह ही दिशानिर्देशों के दायरे में आती हैं.
अतिरिक्त लोक अभियोजक प्राजक्ता शिंदे ने अदालत को आश्वासन दिया कि राज्य के सभी स्कूलों द्वारा उठाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी माता-पिता राज्य की वेबसाइट पर देख सकते हैं. बेंच ने खुद कोर्ट में वेबसाइट की समीक्षा की और कुछ अतिरिक्त जानकारी डालने का निर्देश दिया. शिंदे ने 15 अक्टूबर तक सभी अनुपालनों को पूरा करने का आश्वासन दिया.





