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Keylong. केलांग। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति की स्पीति घाटी के छरमा यानी सीबकथॉर्न को भौगोलिक संकेतक(जीआई) टैग मिल गया है। लाहुल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह मांग उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष और कई अन्य प्लेटफॉर्म पर रखी थी। विधायक ने स्पीति घाटी के अमर सिंह के विशेष योगदान को भी सराहा, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अमर सिंह और सभी साथियों का आभार प्रकट किया।अनुराधा राणा ने कहा कि जीआई टैग मिलने से अब स्पीति के छरमा और इससे बने उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। इससे आमजन, विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले लाहौल में बने दस्ताने और जुराबों को भी जीआई टैग मिल चुका है। सीबकथोर्न के फल से लेकर पत्तियों और जड़ का इस्तेमाल दवाओं से लेकर सप्लीमेंट समेत अन्य उत्पादों में किया जाता है। इसके अलावा जूस, जैम, बिस्किट से लेकर ग्रीन टी जैसे कई प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। इस पौधे का हर भाग औषधीय गुणों से भरपूर है। ये पौधा माइनस डिग्री तापमान पर भी जीवित रह सकता है। माइनस 40 से 45 डिग्री तापमान में भी फलने फूलने की इसकी खासियत इसे लाहुल-स्पीति के लोगों के लिए आय का बड़ा जरिया बनाती है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार सीबकथोर्न का फल पोषक तत्वों से भरपूर है, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। सीबकथोर्न से बने उत्पाद पेट से जुड़ी बीमारी से लेकर पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत ही कारगर साबित होते हैं।
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